फेयर इलेक्शन की तैयारी: आयोग ने कसी ट्रांसफर नीति की लगाम

विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा एक्शन: इलेक्शन कमीशन ने किया सिस्टम री-सेट, अफसरों की कंफर्ट पोस्टिंग खत्म

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (Election Commission of India) ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि अब चुनाव से पहले कंफर्ट पोस्टिंग नहीं चलेगी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय से एक ही जगह जमे अधिकारियों को हटाया जाएगा।
चुनाव आयोग ने इन पांचों राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि चुनाव प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को न तो उनके गृह जिले (Home District) में तैनात किया जाए और न ही ऐसी जगह जहां वे कई वर्षों से पोस्टेड हैं। यह फैसला फाइनल वोटर लिस्ट जारी करने और चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले लिया गया है, ताकि प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह न्यूट्रल रहे।

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निष्पक्ष चुनाव के लिए सख्त निर्देश
इलेक्शन कमीशन ने अपने पत्र में कहा है कि इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई–जून में समाप्त हो रहा है और संविधान के अनुसार इससे पहले नई विधानसभा का गठन अनिवार्य है। ऐसे में फ्री एंड फेयर इलेक्शन के लिए यह जरूरी है कि चुनाव से जुड़े अफसर किसी भी तरह के स्थानीय प्रभाव या पक्षपात से दूर रहें।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह ट्रांसफर पॉलिसी केवल उन्हीं अधिकारियों पर लागू होगी, जो सीधे तौर पर इलेक्शन ड्यूटी में शामिल होंगे। जिन कर्मचारियों की भूमिका चुनाव से जुड़ी नहीं है, उन्हें इस दायरे से बाहर रखा गया है।

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किन्हें मिलेगी छूट
चुनाव आयोग के अनुसार:
सरकारी डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर, प्रिंसिपल जैसे पदों पर तैनात कर्मियों का ट्रांसफर इस नीति के तहत जरूरी नहीं है।
स्टेट हेडक्वार्टर में तैनात अधिकारी और सेक्टर ऑफिसर/जोनल मजिस्ट्रेट, जिनकी चुनाव में अहम भूमिका होती है, उन पर भी यह नियम लागू नहीं होगा।
लापरवाह अफसरों पर सख्ती
इलेक्शन कमीशन ने यह भी साफ कर दिया है कि जिन अधिकारियों पर पिछले चुनावों में लापरवाही, अनियमितता या गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, या जिनके खिलाफ डिसिप्लीनरी एक्शन पेंडिंग है, उन्हें इस बार चुनाव से जुड़ा कोई काम नहीं सौंपा जाएगा। इससे यह संकेत साफ है कि आयोग किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
चुनावी तैयारी में पारदर्शिता पर जोर
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह फैसला वोटर लिस्ट सुधार, प्रशासनिक निष्पक्षता और चुनाव की विश्वसनीयता को मजबूत करेगा। खासकर पश्चिम बंगाल जैसे संवेदनशील राज्यों में यह कदम चुनावी माहौल को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Editor CP pandey

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