अफवाह से बना ईंधन संकट, प्रशासन की सक्रियता से हालात हुए सामान्य

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में बीते दिनों गैस, डीजल और पेट्रोल को लेकर बना अस्थिरता और अफरा-तफरी का माहौल अब पूरी तरह नियंत्रण में आ गया है। जिला प्रशासन की सतर्कता, त्वरित निर्णय और लगातार निगरानी के चलते हालात सामान्य हो गए हैं। पेट्रोल पंपों पर लगने वाली लंबी कतारें समाप्त हो चुकी हैं और आम लोगों को अब आसानी से ईंधन उपलब्ध हो रहा है। वहीं रसोई गैस की समस्या भी काफी हद तक सुलझ चुकी है।

दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक भ्रम और अफवाह से हुई। लोकसभा में दिए गए एक बयान, जिसमें कोरोना जैसी स्थिति के लिए तैयार रहने की बात कही गई थी, उसे लेकर आम जनता ने अलग अर्थ निकाल लिया। जहां उस बयान का आशय सतर्कता बनाए रखने से था, वहीं लोगों के बीच यह संदेश फैल गया कि पेट्रोल, डीजल और गैस की भारी कमी होने वाली है।

इसी गलतफहमी के कारण अचानक लोग बड़ी संख्या में पेट्रोल पंपों की ओर उमड़ पड़े। सामान्य दिनों में सीमित मात्रा में ईंधन लेने वाले लोग टंकी फुल कराने लगे और कई लोगों ने अतिरिक्त डिब्बों में भी ईंधन भरवाना शुरू कर दिया। इससे मांग में अचानक कई गुना वृद्धि हो गई और कृत्रिम संकट की स्थिति बन गई।

हालात ऐसे हो गए कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। हालांकि वास्तविकता यह थी कि ईंधन की आपूर्ति में कोई कमी नहीं थी। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार 25 मार्च को डीजल 1810 केएल और पेट्रोल 1215 केएल, 26 मार्च को डीजल 2000 केएल और पेट्रोल 1400 केएल तथा 27 मार्च को डीजल 1235 केएल और पेट्रोल 730 केएल उपलब्ध था। इससे स्पष्ट है कि लाखों लीटर ईंधन पर्याप्त मात्रा में मौजूद था।

स्थिति को बिगड़ता देख जिलाधिकारी दीपक मीणा ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट किया। डीएसओ रामेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में आपूर्ति व्यवस्था की सघन निगरानी शुरू की गई। पेट्रोल पंप संचालकों को कालाबाजारी और अनियमितता पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई, वहीं अफवाह फैलाने वालों पर भी नजर रखी गई।

प्रशासन की सख्ती और जागरूकता का असर जल्द ही दिखने लगा। लोगों को समझाया गया कि ईंधन की कोई कमी नहीं है। जैसे ही भरोसा बहाल हुआ, पंपों पर भीड़ कम होने लगी और दो दिनों के भीतर स्थिति सामान्य हो गई। अब सभी पेट्रोल पंपों पर ईंधन सुचारु रूप से उपलब्ध है।

रसोई गैस की समस्या के पीछे उपभोक्ताओं का केवाईसी लंबित होना प्रमुख कारण रहा। कई उपभोक्ताओं ने वर्षों से गैस बुकिंग नहीं कराई थी, जिससे उनके कनेक्शन निष्क्रिय हो गए थे। अचानक मांग बढ़ने पर बिना केवाईसी वाले उपभोक्ताओं की बुकिंग नहीं हो पा रही थी।

प्रशासन ने गैस एजेंसियों को केवाईसी प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए और अभियान चलाकर उपभोक्ताओं को जागरूक किया। अब तक करीब 70 प्रतिशत उपभोक्ताओं का केवाईसी पूरा हो चुका है, जिससे गैस वितरण व्यवस्था में सुधार आया है। शेष उपभोक्ताओं का केवाईसी भी जल्द पूरा कराया जाएगा।

प्रशासन का मानना है कि अफवाहें सामान्य स्थिति को भी संकट में बदल सकती हैं। यदि लोग संयम और समझदारी से काम लें, तो ऐसी स्थितियों से बचा जा सकता है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने यह साबित किया है कि सही समय पर लिए गए निर्णय किसी भी संकट को शीघ्र समाप्त कर सकते हैं।

rkpNavneet Mishra

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