मजार ध्वस्तीकरण पर सियासी घमासान, प्रशासन पर चयनात्मक कार्रवाई और दबाव के आरोप


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।गोरखपुर रोड ओवरब्रिज से सटी मजार पर की गई ध्वस्तीकरण कार्रवाई अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले चुकी है। समान शिक्षा आंदोलन, उत्तर प्रदेश के सहसंयोजक चतुरानन ओझा और ईस्टर्न साइंटिस्ट जर्नल के संपादक अचल पुलस्तेय ने इस कार्रवाई को लेकर प्रशासन और सत्ताधारी दल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे “चयनात्मक, पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई” करार दिया है।
अपने संयुक्त बयान में नेताओं ने कहा कि जिस तेजी और कठोरता के साथ मजार को ध्वस्त किया गया, वह सामान्य अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया नहीं लगती। उनका आरोप है कि यह कदम एक सुनियोजित राजनीतिक एजेंडे के तहत उठाया गया, जिसमें प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग हुआ। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर समाज में सांप्रदायिक विमर्श खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है।

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चतुरानन ओझा ने कहा कि सूफी परंपरा से जुड़ी मजारें केवल किसी एक समुदाय की आस्था का केंद्र नहीं होतीं, बल्कि यह साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक होती हैं। यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं। ऐसे स्थल को बिना सामाजिक संवाद और संवेदनशीलता के ध्वस्त करना प्रशासन की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विरोध करने वालों ने यह भी आरोप लगाया कि मजार जिस क्षेत्र में स्थित थी, वह लंबे समय से विकास और प्रशासनिक ध्यान से वंचित रहा है। श्रद्धालुओं की आस्था के कारण ही उस स्थान को पहचान मिली थी। इसके विपरीत, शहर के कई प्रमुख इलाकों और चौराहों पर सड़क पर बने धार्मिक ढांचे यातायात में बाधा बने हुए हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसे उन्होंने स्पष्ट रूप से “चयनात्मक कार्रवाई” बताया।

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बयान में यह भी कहा गया कि जिन मुद्दों पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को काम करना चाहिए—जैसे स्कूलों की बदहाली, अस्पतालों की दुर्दशा और रोजगार की कमी—उन पर ध्यान देने के बजाय धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर राजनीतिक संदेश दिया जा रहा है। इसे जनता के मूल सवालों से ध्यान भटकाने की रणनीति बताया गया।
समान शिक्षा आंदोलन ने मांग की है कि मजार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी व संवैधानिक समीक्षा कराई जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की कार्रवाई जारी रही, तो इसे केवल एक ढांचे का नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द पर सीधा हमला माना जाएगा।

Editor CP pandey

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