नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पोंगल पर्व से जुड़े एक विशेष कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कृषि और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग को लेकर देश को स्पष्ट और दूरदर्शी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की रक्षा, जल संरक्षण और संसाधनों का संतुलन केवल पर्यावरणीय मुद्दे नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े राष्ट्रीय दायित्व हैं।
केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि पोंगल केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को जीवनशैली में ढालने की प्रेरणा है। जब धरती हमें निरंतर देती है, तो उसका संरक्षण हमारा नैतिक कर्तव्य बन जाता है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि मिशन लाइफ, एक पेड़ मां के नाम और अमृत सरोवर जैसी पहलें इसी सोच को जन-आंदोलन में बदल रही हैं। इन प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाया जा रहा है।
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टिकाऊ कृषि और जल प्रबंधन पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार किसानों को सशक्त बनाने और कृषि को पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने “पहली बूंद, अधिक फसल” के मंत्र के तहत प्रभावी जल प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, कृषि प्रौद्योगिकी और मूल्यवर्धन को भविष्य की कृषि की रीढ़ बताया।
युवाओं की भागीदारी से बदलेगी खेती की तस्वीर
प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में युवाओं की बढ़ती भागीदारी को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने तमिलनाडु में प्राकृतिक खेती पर हुए सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि कई युवाओं ने बेहतर भविष्य के लिए उच्च वेतन वाली नौकरियां छोड़कर खेती को अपनाया है, जो भारत के कृषि भविष्य के लिए शुभ संकेत है।
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पीएम ने मनाया पोंगल तमिल सभ्यता से भारत को दिशा
पीएम मोदी ने तमिल सभ्यता को विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक बताते हुए कहा कि यह संस्कृति इतिहास से सीख लेकर वर्तमान का मार्गदर्शन और भविष्य का निर्माण करती है। आज का भारत भी अपनी जड़ों से शक्ति लेकर नई संभावनाओं की ओर अग्रसर है।
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