पायलट शेड्यूलिंग में चूक ने उजागर की एयरलाइन की प्लानिंग कमजोरियां

नियम लागू करने में चूक से बिगड़ा देश का सबसे बड़ा एयर नेटवर्क

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo इन दिनों अपनी भारी संख्या में रद्द और विलंबित उड़ानों के कारण गंभीर संकट से गुजर रही है। पिछले कुछ सप्ताहों में हजारों यात्रियों को हवाई अड्डों पर घंटों इंतजार करना पड़ा, जिससे सोशल मीडिया पर शिकायतों का अंबार लग गया। इस पूरे संकट की जड़ में हैं पायलटों की ड्यूटी और आराम से जुड़े नए नियम Flight Duty Time Limitation (FDTL), जिन्हें लागू करने में IndiGo बुरी तरह असफल रही।

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FDTL नियमों का उद्देश्य पायलटों को पर्याप्त आराम देना, रात की उड़ानों की संख्या नियंत्रित करना और सुरक्षा को मजबूत करना था। लेकिन इन नियमों को लागू करने के लिए आवश्यक क्रू मैनेजमेंट, शेड्यूलिंग और संसाधनों की तैयारी IndiGo ने समय पर नहीं की। नतीजा यह हुआ कि अचानक पायलटों की उपलब्धता प्रभावित हुई और एयरलाइन की बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द या लेट होने लगीं।

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यात्रियों की परेशानी बढ़ती देख DGCA ने कड़ा कदम उठाते हुए IndiGo की उड़ान क्षमता में 5 प्रतिशत कटौती का आदेश दिया। इसका मतलब है कि एयरलाइन अपनी लगभग 2,300 दैनिक उड़ानों में से करीब 115 उड़ानें रोजाना कम करेगी। DGCA ने कंपनी को नया शेड्यूल जारी करने, व्यवस्था स्थिर करने और भविष्य में ऐसी गड़बड़ी न होने देने के निर्देश भी दिए हैं। चेतावनी भी दी गई है कि यदि सुधार नहीं दिखा तो कटौती और बढ़ाई जा सकती है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच समिति गठित की गई है, जो यह पता लगाएगी कि क्या IndiGo को पहले से इस चुनौती के बारे में चेताया गया था और क्या एयरलाइन प्रबंधन ने उन चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया।

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उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा—“नियम और कानून व्यवस्था सुधारने के लिए होते हैं, लोगों को परेशान करने के लिए नहीं।” उनका बयान स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार सुरक्षा पर समझौता नहीं करेगी, लेकिन नियम लागू करने की प्रक्रिया यात्रियों को कष्ट देने वाली नहीं होनी चाहिए।

DGCA ने हालात को संभालने के लिए कुछ नियमों में अस्थायी राहत जरूर दी है, लेकिन मूल समस्या—IndiGo की तैयारी और प्लानिंग की कमी—अब भी जांच का विषय बनी हुई है। चूंकि भारतीय एविएशन सेक्टर में IndiGo की हिस्सेदारी 60–65% तक है, इसकी किसी भी कमी का सीधा प्रभाव पूरे देश की हवाई यात्रा व्यवस्था पर पड़ता है।

यह संकट बड़ा सबक भी देता है कि सिर्फ नियम बनाना काफी नहीं, बल्कि उन नियमों को लागू करने के लिए एयरलाइन का तैयार और सक्षम होना जरूरी है। FDTL जैसे नियम सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य हैं, लेकिन उनकी गलत या अधूरी तैयारी यात्रियों की परेशानी को बढ़ा देती है।

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अब जरूरत है कि IndiGo अपने संचालन, संसाधन प्रबंधन और शेड्यूलिंग सिस्टम को सुधारते हुए यात्रियों का भरोसा वापस हासिल करे, ताकि भविष्य में IndiGo Flight Crisis जैसी स्थिति दोबारा न बने।

Editor CP pandey

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