बनारस फिजियो कांक्लेव 2026: बीएचयू में फिजियोथेरेपी को मिला राष्ट्रीय पहचान, इनोवेशन एंड एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मान
वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा स्वास्थ्य डेस्क)बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी काशी एक बार फिर चिकित्सा नवाचार और स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल की साक्षी बनी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के प्रतिष्ठित परिसर में आयोजित Banaras Physio Conclave 2026 में फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ डी.के.पाण्डेय देवरिया को “इनोवेशन एंड एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे फिजियोथेरेपी समुदाय के लिए गर्व का क्षण है।
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इस भव्य कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री रहे। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने फिजियोथेरेपी की बढ़ती भूमिका और इसके व्यापक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
फिजियोथेरेपी अब केवल हड्डियों तक सीमित नहीं: उपमुख्यमंत्री
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज के समय में फिजियोथेरेपी केवल हड्डियों की बीमारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह हर प्रकार की बीमारियों के उपचार में सरल, सुरक्षित और आधुनिक पद्धति के रूप में स्थापित हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपिस्ट आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ संवाद और व्यवहारिक समझ के माध्यम से मरीजों का उपचार कर रहे हैं, जो इसे अन्य चिकित्सा पद्धतियों से अलग और प्रभावी बनाता है।
CSC और PSC केंद्रों पर फिजियोथेरेपी वैकेंसी का भरोसा
Banaras Physio Conclave 2026 में दिए गए अपने संबोधन के दौरान उपमुख्यमंत्री ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि राज्य के सभी CSC (कम्युनिटी हेल्थ सेंटर) और PSC (प्राइमरी हेल्थ सेंटर) पर फिजियोथेरेपी सेवाओं की अत्यंत आवश्यकता है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि जरूरत पड़ी तो वे नियमों से हटकर भी फिजियोथेरेपी के हित में निर्णय लेने को तैयार हैं और राज्यभर में फिजियोथेरेपिस्ट की वैकेंसी सुनिश्चित की जाएगी। यह घोषणा प्रदेश के हजारों फिजियोथेरेपिस्ट युवाओं के लिए आशा की नई किरण लेकर आई है।
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संवाद आधारित उपचार: फिजियोथेरेपी की सबसे बड़ी ताकत
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जहां अन्य चिकित्सा पद्धतियों में उपचार को कठिन बताया जाता है, वहीं एक फिजियोथेरेपिस्ट मरीज से संवाद, समझ और विश्वास के माध्यम से उसे मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ करता है।
उन्होंने कहा कि कोई भी फिजियोथेरेपिस्ट चुपचाप इलाज नहीं करता, बल्कि मरीज से बातचीत कर, उसकी समस्या को समझकर और हर स्तर पर उसके साथ जुड़कर उपचार करता है। यही कारण है कि फिजियोथेरेपी आज सबसे मानवीय चिकित्सा पद्धति बनकर उभरी है।
स्पोर्ट्स इंजरी और न्यूरोलॉजिकल रोगों में फिजियोथेरेपी की अहम भूमिका
Banaras Physio Conclave 2026 में स्पोर्ट्स इंजरी को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आज खेल जगत में फिजियोथेरेपी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने कहा कि नस, दिमाग, पैरालिसिस, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर, स्ट्रोक, रीढ़ की समस्या और मांसपेशियों से जुड़ी कोई भी बीमारी ऐसी नहीं है, जिसमें फिजियोथेरेपी की उपयोगिता न हो। यह चिकित्सा पद्धति हर उम्र और हर रोग में प्रभावी साबित हो रही है।
BHU में फिजियोथेरेपी को मिलेगा स्वतंत्र विभाग का दर्जा
कार्यक्रम का सबसे ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव डालने वाला ऐलान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) को लेकर किया गया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक फिजियोथेरेपी हड्डी रोग विभाग के अंतर्गत संचालित होती रही है, लेकिन अब फिजियोथेरेपी और प्रोफेशनल थेरेपी को एक स्वतंत्र विभाग के रूप में स्थापित किया जाएगा।
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उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में आवश्यक प्रस्ताव और पेपर संबंधित स्तर पर सबमिट कर दिए गए हैं। यह निर्णय फिजियोथेरेपी शिक्षा, शोध और रोजगार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
Banaras Physio Conclave 2026: फिजियोथेरेपी के भविष्य की नई दिशा
Banaras Physio Conclave 2026 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि फिजियोथेरेपी के भविष्य की रूपरेखा तय करने वाला मंच साबित हुआ। देशभर से आए विशेषज्ञों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने इसमें भाग लेकर फिजियोथेरेपी के नवाचार, रिसर्च और क्लीनिकल प्रैक्टिस पर मंथन किया।
इनोवेशन एंड एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026 से सम्मानित होना इस बात का प्रमाण है कि फिजियोथेरेपी अब भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली का एक अनिवार्य स्तंभ बन चुकी है।
निष्कर्ष
Banaras Physio Conclave 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाला समय फिजियोथेरेपी का है। सरकारी स्तर पर मिल रहा समर्थन, शैक्षणिक संस्थानों में स्वतंत्र पहचान और जमीनी स्तर पर बढ़ती जरूरतें इस पेशे को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी।
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