लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर बच्चों की शिक्षा को सर्वोपरि बताते हुए पीडीए पाठशाला के महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “बच्चों की शिक्षा से किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जा सकता।” उनका यह बयान मौजूदा समय में शिक्षा के मुद्दे पर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है और स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी इस विषय पर कितनी गंभीर है।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि पीडीए पाठशाला केवल एक शैक्षणिक पहल नहीं, बल्कि समाज सेवा का प्रतीक बन चुकी है। यह स्कूल उन बच्चों को शिक्षा मुहैया करवा रहा है, जिन्हें मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से बाहर कर दिया गया है या जो आर्थिक, सामाजिक कारणों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हैं।
“लोकतंत्र में शिक्षा का अधिकार सर्वोपरि”
सपा अध्यक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पीडीए पाठशाला को रोकने या बाधित करने का कोई भी प्रयास सीधे तौर पर लोकतंत्र के खिलाफ होगा। उन्होंने कहा कि यह पहल संविधान के उस मूल उद्देश्य को पूरा करती है, जिसमें हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार दिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज के सभी वर्गों को मिलकर ऐसे प्रयासों का समर्थन करना चाहिए, ताकि भविष्य की पीढ़ी शिक्षित, सशक्त और संवेदनशील बन सके।
पीडीए पाठशाला क्या है?
पीडीए पाठशाला, समाजवादी पार्टी द्वारा शुरू की गई एक अनौपचारिक शिक्षा मुहिम है, जिसका उद्देश्य वंचित तबके के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देना है। इस पहल में पार्टी कार्यकर्ता शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं और बच्चों को पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों की भी शिक्षा दी जा रही है।
विरोध को लेकर सख्त रुख
हाल के दिनों में कुछ क्षेत्रों में पीडीए पाठशाला को लेकर प्रशासनिक अड़चनें सामने आई हैं। ऐसे में सपा अध्यक्ष का यह बयान उन सभी प्रयासों के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है, जो इस समाजसेवी मुहिम को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं।समाजवादी पार्टी का यह रुख दर्शाता है कि वह शिक्षा को सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि समाज के निर्माण की बुनियाद मानती है। पीडीए पाठशाला जैसे प्रयास समाज को जोड़ने, समरसता को बढ़ाने और लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
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