मऊ(राष्ट्र की परम्परा)l राहुल सांकृत्यायन सृजनपीठ के सभागार में रविवार को साहित्य उन्नयन संघ व जन संस्कृति मंच के तत्वावधान में प्रसिद्ध पंजाबी कवि सुरजीत पातर की स्मृति में, एक काव्य संध्या का आयोजन किया गया।कविता पाठ के पूर्व डॉ .जयप्रकाश धूमकेतु ने पंजाब के प्रसिद्ध कवि सुरजीत पातर के संबंध में बातचीत करते हुए बताया कि वे प्राध्यापक के साथ-साथ पंजाब के एक बहुत बड़े कवि भी थे,उनकी कविताएं आम जनमानस में बहुत लोकप्रिय थीं उनकी स्मृति में काव्य-गोष्ठी का आयोजन करना उनको सच्ची श्रदांजलि देना है।समकालीन सोच के सम्पादक रामनगीना कुशवाहा ने कविता की सार्थकता के विषय पर चर्चा करते हुआ कहा कि सच्ची और अच्छी कविता वही होती है जो समाज को रास्ता दिखाने का काम करती है।
काव्य पाठ की शुरुआत में गाजीपुर के कवि चेतन ग्रामीण ने ‘व्यथा बूढ़े माँ-बाप की’ सुनाकर आज के दौर में बुजुर्गों की दयनीय स्थिति का चित्रण किया।आजमगढ़ के शायर आदित्य आजमी ने ‘इक शजर जिन्दगी में लगाया नहीं’ के माध्यम से दुनिया के सामने उत्पन्न हो रहे पर्यावरणीय संकट की ओर इशारा किया।आर्थिक विषमता का चित्रण करते हुए जितेन्द्र मिश्र’काका’ ने ‘आजकल हाथ बहुत तंग बा’ सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी।भोजपुरी के प्रसिद्ध कवि कृष्णदेव’घायल’ ने अपने व्यंग्य ‘बस टेशन के भवन में पुलिस चौकी, रऊवा देखले बानी’ के माध्यम से प्रशासन-व्यवस्था पर गहरी चोट की।रवींद्रनाथ यादव ने ‘बेटी न रही त कइसे आई दुलहिनिया’ सुनाकर भ्रूणहत्या रोकने की अपील की।युवा कवि रामअवध कुशवाहा ने ‘शब्द’ पर कविता सुनाई।तुफान सिंह ‘यूँ ही सिसक-सिसक के रिश्ते हैं चल रहे’ बृजेश गिरि ‘मेरी खुशी के लिए वो खुशी से हार गया’ सुरेंद्र सिंह ‘चांस’ ‘अब ना चलिहें केवनो बहाना’ डॉ.धनञ्जय शर्मा ‘आज भात नहीं मिला’ गिरीश मासूम ‘जब घर में बड़ी बेटियाँ हो गई’ सुनाकर देर शाम तक काव्य की रसधार बहाते रहे।कार्यक्रम के अध्यक्ष मनोज सिंह ने’अब तो आ जाओ निष्ठुर निर्मोही, मेरे आवारा, हरजाई बादल’ सुनाकर सबका दिल जीत लिया।फकरे आलम,शिवकुमार प्रियदर्शी एवं वरिष्ठ कवि रमेश राय ने भी काव्य-पाठ किया।काव्य-गोष्ठी का संचालन दिलीप सिंह चौहान ने किया। इस मौके पर अजीम भाई,बृकेश यादव,प्रमोद राय,निशा यादव,वीरेंद्र,मरछू राम,रमेश आदि मौजूद रहे।
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