बलिया(राष्ट्र की परम्परा) हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में शामिल श्रीमद्भागवत कथा को मोक्षदायिनी माना गया है। शिक्षक एवं साहित्यकार सीमा त्रिपाठी ने बताया कि श्रीमद्भागवत पुराण का मूल आधार भक्ति योग है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण को देवाधिदेव एवं परब्रह्म के रूप में वर्णित किया गया है। श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का सगुण-निर्वाचन इसी कथा में मिलता है। उन्होंने कहा कि कलयुग में श्रीमद्भागवत कथा एक कल्पवृक्ष के समान है। इसका श्रवण मन का शुद्धिकरण करता है, जन्म–जन्मांतर के पापों का नाश करता है तथा भक्ति, शांति और सद्बुद्धि प्रदान करता है। कथा सुनने से व्यक्ति का लौकिक एवं आध्यात्मिक दोनों प्रकार का विकास होता है।सीमा त्रिपाठी ने बताया कि राजा परीक्षित को भागवत कथा के श्रवण से ही मोक्ष प्राप्त हुआ था। आज भी इसके अनेक प्रत्यक्ष उदाहरण सामने आते हैं, जिससे सिद्ध होता है कि कथा का प्रभाव कलयुग में भी उतना ही प्रबल है। उन्होंने कहा कि कथा का लाभ प्राप्त करने में श्रोता और वक्ता दोनों की मन:स्थिति का विशेष महत्व है। यदि दोनों निष्काम और शुद्ध भाव से कथा में उपस्थित हों तो पूर्ण फल मिलता है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अत्यंत मूल्यवान है, किंतु सांसारिक मोह-माया में फंसकर मनुष्य अक्सर अपने जीवन का उद्देश्य भूल जाता है। ऐसे समय में सत्संग और कथा मनुष्य को सही दिशा प्रदान करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा जीवन को अर्थपूर्ण बनाती है तथा व्यक्ति को ईश्वर की ओर अग्रसर करती है। सीमा त्रिपाठी के अनुसार कलयुग में श्रीमद्भागवत कथा का स्मरण मात्र करोड़ों पुण्यों का फल प्रदान करता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि प्रत्येक व्यक्ति को समय निकालकर अवश्य ही कथा श्रवण करना चाहिए, क्योंकि इसके सुनने मात्र से प्राणी-मात्र का कल्याण संभव है।
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