“एक बार फिर दिल्ली की ओर? उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद बढ़ी मनोज सिन्हा की दावेदारी”

दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) एक नेता जो वाराणसी के मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहा था… इंतजार में था एक फोन कॉल का… और एक चार्टर प्लेन का, जिससे वह उड़ान भरकर देश के सबसे बड़े राज्य—उत्तर प्रदेश—का मुख्यमंत्री बन सके।

वह नेता थे मनोज सिन्हा—पार्टी के कद्दावर प्रदेश अध्यक्ष, जिन्हें 2017 में यूपी का मुख्यमंत्री बनने का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था। उन्हें खुद भी विश्वास था कि मुख्यमंत्री पद की वैधानिक मुहर लगना महज़ एक औपचारिकता भर है। मगर 19 मार्च 2017 को सारे अनुमान, अटकलें और चर्चाएं पीछे छूट गईं, जब योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश की बागडोर सौंप दी गई।

गाजीपुर से लोकसभा चुनाव हारने के बाद मनोज सिन्हा का वह सपना अधूरा रह गया, लेकिन जल्द ही केंद्र सरकार ने उन्हें एक बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी—जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल का पद।

उपराष्ट्रपति का इस्तीफा—नई संभावना?

अब जब भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, राजनीतिक हलकों में नई चर्चा ज़ोर पकड़ रही है—क्या मनोज सिन्हा अब दिल्ली की ओर लौट रहे हैं?

धनखड़ के इस्तीफे ने न केवल राजनीतिक गलियारों को चौंकाया है, बल्कि सत्ता के गलियारों में कई अहम सवाल भी खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को मानसून सत्र के पहले दिन तक वह पूरी तरह सक्रिय थे। उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही चलाई, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की अध्यक्षता की। मगर देर रात उन्होंने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया।

सरकार की रणनीति और अंदरखाने की हलचल

धनखड़ के इस्तीफे के कुछ घंटे पहले तक दिल्ली में सरकार के शीर्ष मंत्रियों की मीटिंग का दौर जारी था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में दोपहर में हुई बैठक के अलावा, कई सीनियर नेताओं के बीच छोटे-छोटे समूहों में मंथन चलता रहा।

पहले तो यह माना गया कि ये बैठके आगामी विधेयकों या “ऑपरेशन सिंदूर” पर रणनीति को लेकर हैं, लेकिन देर रात उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के ऐलान ने इन बैठकों के मायने ही बदल दिए। अब साफ हो गया है कि सरकार को इस घटनाक्रम की पूर्व जानकारी थी और आगे की रणनीति तैयार की जा रही थी।

क्या मनोज सिन्हा बनेंगे उपराष्ट्रपति?

सूत्रों के अनुसार, इस बार उपराष्ट्रपति पद के लिए जिन नामों की चर्चा हो रही है, उनमें मनोज सिन्हा का नाम सबसे ऊपर है। कश्मीर में उनकी प्रशासनिक पकड़, सुलझा हुआ राजनीतिक अनुभव और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा, उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।

भाजपा नेतृत्व एक ऐसे चेहरे की तलाश में है जो संवैधानिक पद की गरिमा बनाए रखने के साथ-साथ राज्यसभा को कुशलता से संचालित कर सके—मनोज सिन्हा उस कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरते हैं।

Editor CP pandey

Recent Posts

RCB vs GT Playing 11: क्या फाइनल में खेलेंगे फिल सॉल्ट? गुजरात अतिरिक्त बल्लेबाज के साथ उतर सकती है

अहमदाबाद (राष्ट्र की परम्परा)। आईपीएल 2026 का महामुकाबला अब बस कुछ ही घंटे दूर है।…

38 minutes ago

Export Levies: पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर केंद्र सरकार ने बढ़ाया शुल्क, 1 जून से लागू होंगी नई दरें

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमानन टर्बाइन ईंधन (ATF)…

47 minutes ago

Deoria News: बरियारपुर थाने के दरोगा पर रिश्वत और अवैध खनन संरक्षण के आरोप, सोशल मीडिया पोस्ट वायरल

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के बरियारपुर थाना क्षेत्र में तैनात एक दरोगा को लेकर…

53 minutes ago

अभिषेक बनर्जी पर हमले को लेकर भड़के राहुल गांधी, BJP पर साधा निशाना; बोले- ‘बदले की राजनीति का घिनौना रूप’

कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा)। पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी…

5 hours ago

APO Recruitment 2026: LLB पास युवाओं के लिए 371 सरकारी पदों पर भर्ती, 8 जून से शुरू होंगे आवेदन

सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे कानून (LLB) स्नातकों के लिए शानदार अवसर सामने आया…

7 hours ago

गाजियाबाद में पैरा एथलीट चिराग त्यागी की संदिग्ध मौत, हत्या की आशंका; राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी का शव पार्क में मिला

गाजियाबाद (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई…

7 hours ago