महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि का बना योग, विधि विधान से पूजा करने से होगी मनोकामना पूर्ण

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 08 मार्च को रात 09 बजकर 47 मिनट से होगी, जिसका समापन 09 मार्च को शाम 06 बजकर 17 मिनट पर होगा। यानी महाशिवरात्रि का त्योहार 08 मार्च, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि का त्योहार बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर ही भगवान भोलेनाथ ने मां पार्वती संग विवाह किया था। ऐसे में हर एक शिवभक्त इस दिन का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करता है और विधि-विधान के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करता है। वैसे तो हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शिवरात्रि आती है और शिवभक्त इस दिन व्रत रखते हुए भगवान भोलेनाथ और मां गौरी की पूजा करते हैं। लेकिन फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि बहुत ही खास होती है। इस दिन महाशिवरात्रि मनाई जाती है। महाशिवरात्रि पर देशभर के सभी शिव मंदिर में भोलेनाथ के दर्शन और पूजा करने के लिए बड़ी भारी भीड़ होती है। एक दूसरी धार्मिक मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ पृथ्वी पर आते हैं और सभी शिवलिंग में विराजमान होते हैं। इस तरह से महाशिवरात्रि पर व्रत रखने और शिव उपासना करने से व्यक्ति के कष्ट दूर होते हैं और हर एक मनोकामना पूरी होती है।

महाशिवरात्रि पर पूजा का शुभ मुहूर्त

निशीथ काल पूजा मुहूर्त : 08 मार्च की मध्यरात्रि 12 बजकर 07 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक।अवधि : 0 घंटे 48 मिनट

महाशिवरात्रि 2024 चार प्रहर पूजा शुभ मुहूर्त

प्रथम प्रहर की पूजा- 08 मार्च शाम 06 बजकर 29 मिनट से रात 09 बजकर 33 मिनट तक दूसरे प्रहर की पूजा- 08 मार्च सुबह 09 बजकर 33 मिनट से 09 मार्च सुबह 12 बजकर 37 मिनट तक तीसरे प्रहर की पूजा-09 मार्च सुबह 12 बजकर 37 मिनट से 03 बजकर 40 मिनट तक चौथे प्रहर की पूजा- 09 मार्च सुबह 03 बजकर 40 मिनट से 06 बजकर 44 मिनट तक पारण मुहूर्त : 09 मार्च की सुबह 06 बजकर 38 मिनट से दोपहर 03 बजकर 30 मिनट तक।

महाशिवरात्रि 2024 पर बना दुर्लभ योग

वाराणसी की ज्योतिषाचार्या पं. आराधना पांडेय ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि पर बहुत ही दुर्लभ संयोग बना हुआ है। इस बार शुक्रवार को महाशिवरात्रि का त्योहार है और इसी दिन शुक्र प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा। महाशिवरात्रि चतुर्दशी तिथि जबकि प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। लेकिन इस बार तिथियों के संयोग के कारण फाल्गुन की त्रयोदशी तिथि और महाशिवरात्रि की पूजा का निशिता मुहूर्त एक ही दिन है। ऐसे में इस बार एक व्रत से दोगुना लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
इसके अलावा इस वर्ष महाशिवरात्रि पर तीन योग भी बन रहे हैं। महाशिवरात्रि के दिन शिव, सिद्ध और सर्वार्थसिद्ध योग का निर्माण हो रहा है। शिवयोग में पूजा और उपासना करने को बहुत ही शुभ माना जाता है। इस योग में भगवान शिव का नाम जपने वाले मंत्र बहुत ही शुभ फलदायक और सफलता कारक होते हैं। वहीं सिद्ध योग में नया कार्य करने पर उसमें पूर्ण सफलता हासिल होती है। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग में हर कार्य में सफलता मिलती है।

महाशिवरात्रि पर इस तरह करें भोलेनाथ की पूजा

वाराणसी की ज्योतिषाचार्या पंडित आराधना पांडेय बताती हैं कि सबसे पहले महाशिवरात्रि पर सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। फिर भोलेनाथ का नाम लेते हुए व्रत और पूजा का संकल्प ले। व्रत के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के मंत्रों का जाप करें। शुभ मुहूर्त में पूजा आरंभ करे। घर के पास स्थित शिव मंदिर जाकर शिवलिंग को प्रणाम करते हुए शिवमंत्रों के उच्चारण के साथ गंगाजल, गन्ने के रस, कच्चे दूध, घी और दही से अभिषेक करें। फिर इसके बाद भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र, भांग, धतूरा और बेर आदि अर्पित करें। अंत में शिव चालीसा और शिव आरती का पाठ करें।

Editor CP pandey

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