Categories: Newsbeat

“पुरानी साइकिल और नई सड़क”

लेखिका – सुनीता कुमारी (बिहार )

​​गाँव के छोर पर रहने वाले अस्सी वर्षीय बुजुर्ग रामू काका की ज़िंदगी एक पुरानी, नीले रंग की साइकिल के पहियों पर घूमती थी। वह साइकिल दशकों पुरानी थी, जगह-जगह से जंग खा चुकी थी, लेकिन काका के लिए वह सिर्फ एक सवारी नहीं, बल्कि उनके जीवन का सहारा थी। हर सुबह, वह उसी पर सवार होकर गाँव की कच्ची पगडंडी से होते हुए बाज़ार जाते, थोड़ी-सी सब्ज़ी बेचते और लौट आते।
​रामू काका की दुनिया बहुत सरल थी— उनकी पुरानी झोंपड़ी, उनकी साइकिल और गाँव के कुछ गिने-चुने लोग। उन्हें अपनी धीमी, शांतिपूर्ण ज़िंदगी बहुत पसंद थी।
​एक दिन, गाँव में बड़ी हलचल हुई। सरकार ने गाँव तक एक चौड़ी, चमचमाती डामर की सड़क बनाने की घोषणा की। गाँव वाले बहुत खुश हुए। अब उनका शहरों से सीधा संपर्क हो जाएगा, व्यापार बढ़ेगा, और एम्बुलेंस भी आसानी से आ पाएगी।गाँव का तेजी से विकास होगा।
​सड़क बनने का काम ज़ोरों पर शुरू हुआ।देखते देखते सड़क बनकर तैयार हो गई। गाँव वाले बहुत खुश थे वही रामू काका उदास थे। उनकी पुरानी, घुमावदार पगडंडी अब सीधी, सपाट नई सड़क में बदल गई थी।
​सड़क बन गई। सब कुछ बदल गया। अब बाज़ार में महंगी मोटर साइकिलों और कारों की तेज़ आवाज़ गूँजती थी। गाँव में कई नए लोग आ गए। उनके कपड़े, उनकी बातें, सब अलग थीं।
​नई सड़क पर रामू काका को अपनी पुरानी साइकिल चलाने में डर लगने लगा। तेज़ रफ़्तार गाड़ियों के आगे उनकी धीमी चाल और जंग लगी साइकिल बेमेल लगती थी। एक दिन, एक तेज़ कार ने उन्हें लगभग टक्कर मार ही दी। वह गिरते-गिरते बचे, लेकिन उनका दिल काँप गया।
​रामू काका ने उदास होकर अपनी साइकिल को झोंपड़ी के कोने में खड़ा कर दिया और घर से निकलना बंद कर दिया।
​गाँव के युवा मुखिया, अंकित ने देखा कि रामू काका कई दिनों से बाज़ार नहीं आए। वह उन्हें देखने उनकी झोंपड़ी तक गया।
​अंकित ने पूछा, “काका, क्या हुआ? आप बाज़ार क्यों नहीं आ रहे?”
​रामू काका ने आह भरते हुए कहा, “अंकित, बेटा! ये सड़क तो सबके लिए अच्छी है, पर मेरे लिए नहीं। ये नई रफ़्तार मेरी पुरानी साइकिल के लिए नहीं बनी है। मुझे डर लगता है।”
​अंकित कुछ देर चुप रहा। फिर उसने मुस्कुराते हुए कहा, “काका, सड़क भले ही नई हो गई हो, लेकिन रिश्ते पुराने ही हैं। ये सड़क गाँव के लिए बनी है, और गाँव के लोग आप जैसे बुजुर्गों के बिना अधूरे हैं।”
​अगले दिन, अंकित कुछ लोगों के साथ आया और उसने नई सड़क के किनारे, काका की झोंपड़ी से बाज़ार तक, केवल साइकिलों और पैदल चलने वालों के लिए एक छोटी सी, सुंदर पक्की लेन बनवा दी। उस लेन को ‘रामू काका लेन’ नाम दिया गया।
​अब रामू काका रोज़ अपनी पुरानी नीली साइकिल पर, अपनी नई, छोटी सी लेन पर खुशी-खुशी बाज़ार जाते। वह समझ गए कि विकास का मतलब यह नहीं है कि, हमें अपनी पुरानी पहचान छोड़ देनी चाहिए, बल्कि यह है कि नई प्रगति में पुराने रिश्तों और ज़रूरतों के लिए भी जगह बनाई जाए।
​यह कहानी इस विचार को दर्शाती है कि आधुनिकीकरण और विकास के साथ-साथ हमें अपने बुजुर्गों और पुरानी जीवनशैली की ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

इसे पढ़ें –🇮🇳 “वायुसेना दिवस पर राष्ट्र गर्वित: राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने दी वीर वायुयोद्धाओं को सलामी”

rkpnews@desk

Recent Posts

स्वदेशी चेतना यात्रा का मगहर में भव्य स्वागत, आत्मनिर्भर भारत का दिया संदेश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। स्वदेशी जागरण मंच एवं अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल…

17 minutes ago

छद्म राष्ट्रवाद बनाम सच्चाई: भाजपा की दोहरी राजनीति पर सपा युवा नेता का हमला

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।समाजवादी पार्टी के युवा नेता दिव्यांश श्रीवास्तव ने भाजपा की राष्ट्रवाद की…

60 minutes ago

ऑपरेशन कन्विक्शन से बढ़ी सजा की दर, गंभीर अपराधों में अपराधियों पर कसा शिकंजा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान…

1 hour ago

‘Toxic’ टीज़र विवाद: यश संग रोमांटिक सीन पर ट्रोल हुईं एक्ट्रेस, इंस्टाग्राम अकाउंट किया डिलीट

साउथ सुपरस्टार यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ का टीज़र सोशल मीडिया…

1 hour ago

ठेकेदार और विभागीय उदासीनता से बढ़ी जल संकट की चिंता

लापरवाही की कीमत: सड़क पर बहा पीने का अनमोल पानी, हजारों लीटर की बर्बादी से…

2 hours ago

कृषि विभाग की अपील: समय पर प्रबंधन से बचाएं रबी फसलों की उपज

आगरा(राष्ट्र की परम्परा)जनपद में रबी फसलों को कीट एवं रोगों से सुरक्षित रखने के लिए…

2 hours ago