🇮🇳 भारत में ब्रिटेन की नई चाल: कीर स्टार्मर की ‘मुंबई लैंडिंग’ से शुरू हुआ नया भू-राजनीतिक समीकरण!

मुंबई/नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।
जब भी दुनिया का कोई देश राजनीतिक अस्थिरता या आर्थिक संकट में घिरता है, उसकी नज़र भारत की ओर टिक जाती है। कुछ ऐसा ही इस बार ब्रिटेन के साथ भी देखने को मिल रहा है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर इन दिनों भारत दौरे पर हैं — लेकिन उनका दिल्ली नहीं बल्कि मुंबई उतरना अपने आप में एक बड़ा जियो-पॉलिटिकल संकेत माना जा रहा है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का यह दो दिवसीय (8–9 अक्टूबर) भारत दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि अमेरिका-भारत टैरिफ विवाद के बीच उभरते नए आर्थिक समीकरण की बिसात है — जो वाशिंगटन को खटक सकती है।

मुंबई एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने स्टार्मर का भव्य स्वागत किया। राज्यपाल आचार्य देवत्त भी इस मौके पर मौजूद रहे।
🔹 मोदी-स्टार्मर मुलाकात: भारत-ब्रिटेन रिश्तों का नया अध्याय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष कीर स्टार्मर की मुलाकात गुरुवार सुबह 10 बजे राजभवन, मुंबई में होगी। इस उच्च-स्तरीय वार्ता में व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश और जलवायु नीति जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है।
बैठक के बाद दोनों नेता संयुक्त प्रेस वार्ता में अपने विचार साझा करेंगे और भारत-ब्रिटेन साझेदारी के भविष्य की दिशा तय करेंगे। दोपहर 1:40 बजे, ब्रिटिश प्रधानमंत्री जियो वर्ल्ड सेंटर में सीईओ फोरम को संबोधित करेंगे, जहां दोनों देशों के उद्योग जगत के दिग्गज आपसी सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे।
🔹 ‘विज़न 2035’ के तहत नए युग की तैयारी
भारत और ब्रिटेन के बीच वृहद रणनीतिक साझेदारी को लेकर यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। दोनों नेता “विज़न 2035” योजना की प्रगति की समीक्षा करेंगे — जो कि जुलाई में हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का विस्तारित रोडमैप है।
इस योजना का लक्ष्य है दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग को गहराई देना।
स्टार्मर इस यात्रा पर 100 से अधिक व्यापारिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों के साथ भारत आए हैं — जो दोनों देशों के बीच संबंधों को नए मुकाम पर ले जाने की दिशा में काम करेंगे।
🔹 अमेरिका पर दबाव, भारत पर भरोसा
विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिटेन की यह पहल अमेरिका और भारत के बीच चल रहे टैरिफ तनाव के बीच एक संतुलन साधने की कोशिश है। लंदन अब चाहता है कि भारत के साथ उसके आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते एक स्वतंत्र दिशा में आगे बढ़ें, ताकि वैश्विक दक्षिण (Global South) में ब्रिटेन की भूमिका मज़बूत हो सके।

इसे पढ़ें –🇮🇳 “वायुसेना दिवस पर राष्ट्र गर्वित: राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने दी वीर वायुयोद्धाओं को सलामी”

rkpnews@desk

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