जिले में किसी पुलिसकर्मी को नहीं मिलता मूंछ भत्ता


ढाई हजार पुलिसकर्मी, पर मानक अनुसार मूंछ वाला एक भी नहीं
बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।
कभी पुलिस विभाग की पहचान रही घनी और तावदार मूंछें आज बलिया जनपद में लगभग गायब हो चुकी हैं। ब्रिटिश शासनकाल से चली आ रही यह परंपरा न सिर्फ शौर्य और अधिकार का प्रतीक मानी जाती थी, बल्कि इसे बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों को विशेष भत्ता भी मिलता था। लेकिन बदलते समय और नए चलन ने पुलिस विभाग का यह पारंपरिक रूप समाप्त कर दिया है। जिले में ढाई हजार से अधिक सिपाही व हेड कांस्टेबल तथा करीब 500 उपनिरीक्षक और निरीक्षक तैनात हैं, मगर इनमें से कोई भी पुलिसकर्मी मानक के अनुसार मूंछें नहीं रखता। इसी कारण आज जिले में किसी को भी ‘मूंछ भत्ता’ नहीं दिया जा रहा है।
पुराने समय में जवानों की घनी मूंछें उन्हें आमजन से अलग पहचान देती थीं। मूंछों को पुलिस के रौब और अनुशासन का अनिवार्य हिस्सा माना जाता था। यही वजह थी कि मूंछों की साफ-सफाई और रखरखाव के लिए विभाग की ओर से भत्ता देने की व्यवस्था की गई थी। पूर्व में यह भत्ता 50 रुपये प्रतिमाह था, जिसे सरकार ने वर्ष 2019 में बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया। इसके बावजूद विभाग के पास आज एक भी ऐसा आवेदन नहीं है, जिसमें किसी पुलिसकर्मी ने मानक के अनुरूप मूंछ रखने के आधार पर इस भत्ते की मांग की हो।सूत्र बताते हैं कि पहले जिले में एक जवान को यह भत्ता मिल रहा था, लेकिन पिछले वर्ष से यह भी बंद हो गया है। निरीक्षण के दौरान भी अधिकारी अब शायद ही किसी जवान को घनी और मानक के अनुरूप मूंछों के साथ देखते हों। कुछ पुलिसकर्मी मूंछें रखते भी हैं, लेकिन वे विभागीय मापदंडों पर खरी नहीं उतरतीं।
एएसपी उत्तरी बलिया कृपाशंकर के अनुसार, “मानक के अनुसार मूंछ रखने पर पुलिसकर्मी को भत्ता मिलता है, विभाग इसे देने में सक्षम है। लेकिन फिलहाल जिले में ऐसा कोई आवेदन नहीं आया है। यदि कोई जवान मानक अनुसार मूंछ रखकर आवेदन करता है तो उसे भत्ता अवश्य दिया जाएगा।”वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मानते हैं कि समय के साथ पुलिसकर्मियों का पहनावा, तौर-तरीके और फैशन बदल गया है। नई भर्ती में शामिल अधिकांश युवा मूंछें रखना पसंद नहीं करते। उनका मानना है कि साफ-सुथरा चेहरा आधुनिक और प्रोफेशनल छवि का प्रतीक माना जाता है।अंग्रेजी शासन की पहचान रही यह परंपरा अब लगभग समाप्त हो चुकी है। कभी मूंछों पर ताव देने वाले पुलिस जवान आज क्लीन-शेव लुक में दिखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि भविष्य में कोई जवान परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मानक के अनुसार मूंछ रखता है, तो उसे नियमानुसार मूंछ भत्ता अवश्य मिलेगा। इस प्रकार बलिया पुलिस विभाग में तावदार मूंछ की पहचान अब इतिहास बनकर रह गई है, जबकि नियम अब भी अस्तित्व में है—बस दावेदार नहीं है।

rkpnews@somnath

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