डॉ. एमजीआर संस्थान का डंका, 17 राज्यों की 76 टीमों ने दिखाया दम
नारायणी नदी के तट पर सजा विज्ञान और नवाचार का राष्ट्रीय मंच
61 कैनसैट और मॉडल रॉकेट लॉन्च कर छात्रों ने दिखाई तकनीकी प्रतिभा
सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने क्षेत्र में स्थायी अंतरिक्ष प्रयोग केंद्र स्थापित करने की जताई आकांक्षा
कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। नारायणी नदी का तट, आसमान छूने का सपना और देशभर के युवा वैज्ञानिकों का जुनून! कुशीनगर के पिपराघाट जंगलीपट्टी में आयोजित इन-स्पेस नारायणी रॉकेट्री कप 2026 में विद्यार्थियों ने अपनी तकनीकी प्रतिभा से ऐसा प्रदर्शन किया कि अहमदाबाद से चेन्नई तक की टीमों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में मॉडल रॉकेट्री का खिताब अहमदाबाद की निरमा यूनिवर्सिटी ने अपने नाम किया, जबकि कैनसैट इंडिया स्टूडेंट कंप्टीशन में चेन्नई के डॉ. एमजीआर एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने बाजी मार ली।
31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक चले इस आयोजन का मंगलवार को समापन हुआ। इसमें देश के 17 राज्यों की 76 छात्र टीमों ने हिस्सा लेकर विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि अब इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की भागीदारी के साथ-साथ रॉकेट और कैनसैट लॉन्च की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कैनसैट में भुवनेश्वर और बेंगलुरु का भी शानदार प्रदर्शन कैनसैट इंडिया स्टूडेंट कंप्टीशन में भुवनेश्वर की सीवी रमन ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने दूसरा और बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं, मॉडल रॉकेट्री प्रतियोगिता में कोयंबटूर के करुण्या इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज ने दूसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी तीसरे स्थान पर रही। प्रतियोगिता में सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि टीमवर्क और तकनीकी डिजाइन की उत्कृष्टता को भी सम्मान दिया गया। कैनसैट श्रेणी में जम्मू की सेंट्रल यूनिवर्सिटी को बेस्ट टीम और बिट्स पिलानी के हैदराबाद परिसर को बेस्ट डिजाइन अवार्ड मिला।
मॉडल रॉकेट्री में मुंबई के द्वारकादास जे. संघवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को बेस्ट टीम और पुणे के पिंपरी चिंचवड़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को बेस्ट डिजाइन अवार्ड से नवाजा गया। दोनों प्रतियोगिताओं के विजेताओं को ईवी सोसाइटी, बेंगलुरु की ओर से पुरस्कार प्रदान किए गए। आईटेलीमैटिक्स सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड इस आयोजन का उद्योग साझेदार रहा। 61 लॉन्च, तकनीक की कठिन परीक्षा और युवा वैज्ञानिकों का हुनर इन-स्पेस की ओर से आयोजित तीसरी कैन-7यूसेट इंडिया स्टूडेंट कंप्टीशन और दूसरी नेशनल मॉडल रॉकेट्री इंडिया स्टूडेंट कंप्टीशन में विद्यार्थियों को अपने विचारों को वास्तविक तकनीकी प्रयोग में बदलने का अवसर मिला। प्रतिभागियों ने उपकरणों की डिजाइनिंग, निर्माण और परीक्षण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में हिस्सा लिया। आयोजन के दौरान कुल 43 कैनसैट और 18 मॉडल रॉकेट लॉन्च किए गए। यानी विद्यार्थियों ने कुल 61 लॉन्च के माध्यम से अपने बनाए उपकरणों की कार्यक्षमता और तकनीकी समझ का प्रदर्शन किया। इनकी गुणवत्ता और प्रदर्शन का मूल्यांकन इसरो, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), इन-स्पेस, उद्योग जगत और शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों की समितियों ने किया। कैनसैट एक छोटे उपग्रह जैसी संरचना वाला शैक्षणिक उपकरण होता है, जिसके जरिए विद्यार्थी अंतरिक्ष अभियानों से जुड़ी तकनीकों को समझते हैं। वहीं, मॉडल रॉकेट्री विद्यार्थियों को रॉकेट डिजाइन, उड़ान और तकनीकी परीक्षण का व्यावहारिक अनुभव देती है। ऐसे आयोजन छात्रों को किताबों से आगे बढ़कर वास्तविक इंजीनियरिंग चुनौतियों से रूबरू कराते हैं। इन-स्पेस के अधिकारी बोले—विद्यार्थियों की मेहनत ने आयोजन को बनाया सफल इन-स्पेस के निदेशक (प्रमोशन निदेशालय) डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों के समर्पण और पूरे साल की मेहनत ने प्रतियोगिता के इस संस्करण को सफल बनाया। उनके मुताबिक, ऐसे आयोजन छात्रों को अपनी क्षमता परखने, व्यावहारिक अनुभव हासिल करने और भारत के तेजी से विकसित होते अंतरिक्ष क्षेत्र में योगदान देने के लिए तैयार करते हैं।
इसरो के पूर्व एसोसिएट निदेशक और मॉडल रॉकेट्री मूल्यांकन समिति के प्रमुख रॉय एम. चेरियन ने कहा कि रॉकेट्री और उपग्रह प्रणालियां बेहद जटिल इंजीनियरिंग क्षेत्र हैं। इनमें गाइडेंस, संचार और नियंत्रण जैसी कई तकनीकों का समन्वय आवश्यक होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने डिजाइन में लगातार सुधार करने और तकनीकी प्रयोगों के व्यावहारिक पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने पुरस्कार से चूकने वाले प्रतिभागियों के प्रयासों को भी सराहनीय बताया। सांसद शशांक मणि का विजन—कुशीनगर में बने स्थायी अंतरिक्ष प्रयोग केंद्र कार्यक्रम को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित करते हुए देवरिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने क्षेत्र में स्थायी अंतरिक्ष प्रयोग केंद्र स्थापित करने की आकांक्षा जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा केंद्र स्थापित होने से स्थानीय युवाओं को पूरे वर्ष रॉकेट्री, उपग्रह तकनीक और अन्य वैज्ञानिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिल सकेगा। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के महत्व पर भी जोर दिया। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को वास्तविक समस्याओं को समझने, नए प्रयोग करने और वैज्ञानिक नवाचार को समाज तक पहुंचाने के लिए प्रेरित करते हैं। एक साल में बढ़ी रफ्तार, अब बड़े वैज्ञानिक मंच की उम्मीद सांसद शशांक मणि त्रिपाठी की पहल पर इस क्षेत्र में वर्ष 2025 से रॉकेट्री प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है।
पिछले वर्ष आयोजित प्रतियोगिता में 24 कैनसैट और 13 मॉडल रॉकेट लॉन्च किए गए थे। इस वर्ष कैनसैट लॉन्च की संख्या बढ़कर 43 और मॉडल रॉकेट लॉन्च की संख्या 18 पहुंच गई। यह बढ़ोतरी विद्यार्थियों की भागीदारी और आयोजन के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। नारायणी नदी के तट पर आयोजित इस प्रतियोगिता ने कुशीनगर को युवा वैज्ञानिकों की प्रतिभा दिखाने के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया है। अब क्षेत्र में स्थायी अंतरिक्ष प्रयोग केंद्र की स्थापना की परिकल्पना साकार होती है या नहीं, यह भविष्य के प्रयासों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, इस आयोजन ने स्थानीय युवाओं के सामने विज्ञान और अंतरिक्ष तकनीक की दुनिया में आगे बढ़ने की नई संभावनाएं जरूर खोली हैं। राष्ट्र की परम्परा | विज्ञान, शिक्षा और जनहित की खबरों के लिए जुड़े रहें।
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