महंगाई भत्ते का नया फार्मूला: सरकार बदलने जा रही है आधार वर्ष, जेब पर पड़ेगा सीधा असर

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) केंद्र सरकार महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) को लेकर एक बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है, जो पहली नजर में भले ही जटिल या अजीब लगे, लेकिन इसका असर आम कर्मचारियों और पेंशनरों की जेब पर सीधा और लाभकारी पड़ सकता है। दरअसल, सरकार महंगाई भत्ते की गणना में इस्तेमाल हो रहे आधार वर्ष (Base Year) को 2016 से बदलकर 2026 करने की योजना पर काम कर रही है।

क्यों जरूरी है आधार वर्ष में बदलाव?

फिलहाल महंगाई भत्ते की गणना AICPI-IW (All India Consumer Price Index for Industrial Workers) यानी औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के आधार पर की जाती है। यह सूचकांक किसी एक विशेष वर्ष को बेस ईयर मानकर महंगाई में आई वृद्धि को ट्रैक करता है। वर्तमान में 2016 को आधार वर्ष माना जा रहा है। लेकिन अब सरकार इसे बदलकर 2026 करने की दिशा में बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक 2016 और 2026 के बीच देश की आर्थिक व सामाजिक स्थितियों में भारी बदलाव आया है। आम आदमी की जरूरतें, उपभोग की शैली और खर्च के तरीके पूरी तरह से बदल चुके हैं। अब लोग OTT प्लेटफॉर्म, इंटरनेट सेवाएं, हेल्थ सप्लीमेंट्स, गैजेट्स और नई सेवाओं पर अधिक पैसा खर्च कर रहे हैं, जो 2016 के उपभोक्ता टोकरी में शामिल नहीं थे। ऐसे में मौजूदा सूचकांक सही तस्वीर पेश नहीं करता।

क्या होगा असर?

बेस ईयर बदलने से महंगाई भत्ते की गणना में बड़ा फर्क आएगा। इससे भत्ते की गणना ज्यादा सटीक और व्यावहारिक होगी। भले ही शुरू में DA का आंकड़ा “रीसेट” हो यानी शून्य से नई गणना शुरू की जाए, लेकिन इसका मतलब नुकसान नहीं है।
बल्कि, बदली हुई जरूरतों और खर्च के आधार पर नई गणना ज्यादा रियल टाइम इन्फ्लेशन को प्रतिबिंबित करेगी, जिससे कर्मचारियों और पेंशनधारकों को भविष्य में ज्यादा लाभ मिलने की संभावना है।

विशेषज्ञों की राय

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि आधार वर्ष में बदलाव से महंगाई के आंकड़ों का बेहतर आकलन होगा और कर्मचारी हित में यह बड़ा सुधार साबित हो सकता है। साथ ही इससे सरकारी नीतियों की दिशा भी अधिक पारदर्शी और यथार्थपरक हो जाएगी।

अगला कदम

श्रम मंत्रालय के अधीन काम करने वाला लेबर ब्यूरो इस दिशा में काम कर रहा है। वर्ष 2026 को आधार वर्ष बनाने के लिए नए सर्वे और डाटा संग्रहण का काम जल्द ही शुरू होने वाला है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे वित्त मंत्रालय के अनुमोदन के बाद लागू किया जाएगा।


Editor CP pandey

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