नेपाल संकट पर मोदी का कार्की को फोन, भारत ने दिया हरसंभव सहयोग का भरोसा

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की से टेलीफोन पर वार्ता की, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत-नेपाल संबंधों की मजबूती एवं सामरिक साझेदारी पर बल दिया। वार्ता को दोनों पक्षों ने गर्मजोशीपूर्ण और रचनात्मक करार दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल में हाल ही में हुई दुखद जनहानि पर हार्दिक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने देश में शांति, स्थिरता और सामाजिक सौहार्द्य बहाल करने की दिशा में भारत की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।

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यह वार्ता मोदी और कार्की के बीच पहली बातचीत थी, क्योंकि सुशीला कार्की को हाल ही में नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री पद की ज़िम्मेदारी मिली है।
मोदी ने 19 सितंबर को नेपाल का राष्ट्रीय दिवस (National Day) होने के अवसर पर सुशीला कार्की और नेपाल की जनता को हार्दिक बधाई दी तथा कल इस दिवस के अवसर पर शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
नेपाल में “Gen-Z” विरोध प्रदर्शन के बाद राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई थी, जिसमें व्यापक जनआंदोलन, सोशल मीडिया प्रतिबंध, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ और प्रशासन की जवाबदेही की मांग प्रमुख थी। ये प्रदर्शन हिंसक हो गए थे जिसमें कई लोगों की जानें गईं।
इन घटनाओं के बाद, संसद भंग कर दी गयी और 5 मार्च 2026 को चुनाव कराने की घोषणा की गयी।
भारत की भूमिका एवं महत्व
भारत ने हमेशा की तरह अपने पारंपरिक नाते, दुश्मनी-मुक्त पड़ोसी नीति और क्षेत्रीय शांति को प्राथमिकता दी है। इस समय भारत की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि नेपाल एक संवेदनशील राजनीतिक संक्रमण काल से गुजर रहा है।

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प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा दिए गए आश्वासन से यह संदेश गया कि भारत न केवल कूटनीतिक समर्थन दे रहा है, बल्कि जरूरत पड़ने पर और अधिक सहयोग की संभावनाएँ तलाशेगा, ताकि नेपाल में सामाजिक और राजनीतिक शांति सुनिश्चित हो सके।
यह वार्ता न केवल द्विपक्षीय संबंधों की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नेपाल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली, नागरिकों की उम्मीदों एवं मांगे-अपेक्षाओं के प्रति अंतरराष्ट्रीय समर्थन का प्रतीक भी है। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से बधाई एवं सहयोग की घोषणाएँ यह दर्शाती हैं कि भारत इस परिवर्तनशील स्थिति में नेपाल के साथ खड़ा है।

Editor CP pandey

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