महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)।बुधवार तथा गुरुवार को वटसावित्री पूजा था जिसे वटसावित्री व्रत, सावित्री अमावस्या या वट पूर्णिमा भी कहा जाता है। वट सावित्री के दिन सुहागिनें अपने पति की कामयाबी और सुख-समृद्धि के लिए कामना भी करती हैं। वट सावित्री के वृक्ष के साथ सत्यवान और सावित्री की पूजा भी की जाती है। इस सम्बन्ध में पंडित कृष्ण मोहन त्रिपाठी ने बताया कि वट सावित्री पूजन का शुभ मुहूर्त 05 जून की शाम को 07 बजकर 54 मिनट से शुरू होगा और इसका समापन 6 जून को शाम 06 बजकर 07 मिनट पर होगा। इस कारण वट सावित्री 6 जून को ही मनाई जाएगी। वट सावित्री का व्रत विवाहित महिलाएं पति की लम्बी आयु के लिए रखती हैं।
पौराणिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति की आयु लम्बी होने के साथ रोगमुक्त जीवन के साथ सुख-समृद्धि की प्राप्ति भी होती है। वट सावित्री के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा करने के साथ व्रत सावित्री की कथा भी सुनती है।सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करके पीले रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद अपने पति का चेहरा देखें या अगर आपके पति आपसे दूर रहते हैं, तो उनकी तस्वीर देखें। फिर श्रृंगार करके पूजन सामग्री को एक थाल में रखकर पूजा की तैयारी करें।
वट वृक्ष के नीच सावित्री और सत्यवान की मूर्ति को स्थापित करें। इसके बाद वट वृक्ष में जल अर्पित करके फूल, भीगे चने, गूड़ और मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद वट वृक्ष के चारों तरफ रोली बांधते हुए सात बार परिक्रमा करें। हाथ में चने लेकर वट सावित्री की कथा सुनें या पढ़ें।
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