बरेली में 13 अक्टूबर को हो सकती है बड़ी घोषणा, 2500 से बढ़कर 3500 रुपये हो सकता है मानदेय; पेंशन बढ़ाने की तैयारी भी तेज
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में गांवों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले करीब 60 हजार ग्राम प्रहरियों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे ग्राम प्रहरियों को योगी सरकार बड़ी सौगात दे सकती है। प्रस्ताव के मुताबिक, उनका मासिक मानदेय 2500 रुपये से बढ़ाकर 3500 रुपये किया जा सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 13 अक्टूबर को बरेली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा कर सकते हैं। हालांकि, अभी इस संबंध में आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और अंतिम फैसला सरकार की मुहर के बाद ही स्पष्ट होगा।
हर महीने 1000 रुपये ज्यादा, सालाना 12 हजार का फायदा
प्रस्तावित बढ़ोतरी लागू होती है तो प्रत्येक ग्राम प्रहरी को हर महीने एक हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। इस हिसाब से सालाना 12 हजार रुपये की बढ़ोतरी होगी। कम मानदेय में गांवों की सुरक्षा और पुलिस को सूचनाएं पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने वाले इन कर्मचारियों के लिए यह फैसला बड़ी राहत साबित हो सकता है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री बरेली पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ग्राम प्रहरियों को सम्मानित करने के साथ मानदेय बढ़ाने की घोषणा भी कर सकते हैं।
गांवों में सुरक्षा की पहली कड़ी हैं ग्राम प्रहरी
ग्राम प्रहरी ग्रामीण इलाकों में पुलिस और आम लोगों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं। गांवों में संदिग्ध गतिविधियों, आपसी विवादों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों की जानकारी संबंधित थाने तक पहुंचाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। किसी घटना की शुरुआती सूचना पुलिस तक पहुंचाने में भी उनकी भूमिका अहम होती है। इसके बावजूद सीमित मानदेय के कारण उन्हें आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मानदेय बढ़ाने की संभावित घोषणा से प्रदेशभर के ग्राम प्रहरियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
सरकार पर हर साल 72 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ
प्रदेश में ग्राम प्रहरियों की अनुमानित संख्या करीब 60 हजार है। यदि प्रत्येक कर्मचारी का मानदेय एक हजार रुपये प्रतिमाह बढ़ाया जाता है तो सरकार को हर महीने लगभग छह करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। इस तरह सालाना अतिरिक्त खर्च करीब 72 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। प्रस्ताव को लागू करने के लिए बजट में धनराशि का प्रावधान करना होगा। इसके लिए अनुपूरक बजट में रकम रखे जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक खर्च और बजट की व्यवस्था सरकार के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।
रसोइयों से पंचायत सहायकों तक, कई वर्गों को मिली राहत
योगी सरकार हाल के महीनों में मानदेय और भत्ते पर काम करने वाले विभिन्न वर्गों को राहत देने के फैसले ले चुकी है। परिषदीय स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने वाली करीब 3.53 लाख रसोइयों का मानदेय 2000 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। वहीं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 4000 रुपये और सहायिकाओं के मानदेय में 2000 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी की गई है।
प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों का मानदेय भी 6000 रुपये से बढ़ाकर 9000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। इसके अलावा प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के स्वयंसेवकों का दैनिक भत्ता 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये किया गया है। अब ग्राम प्रहरियों के मानदेय में संभावित बढ़ोतरी को लेकर निगाहें सरकार की घोषणा पर टिकी हैं।
बुजुर्गों, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजनों की पेंशन भी बढ़ने की उम्मीद
ग्राम प्रहरियों के साथ प्रदेश में सामाजिक पेंशन पाने वाले लाखों लोगों के लिए भी राहत की उम्मीद है। प्रस्ताव के मुताबिक, वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिला पेंशन और दिव्यांगजन पेंशन को 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह किया जा सकता है। मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक सहमति के बाद इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाए जाने की बात कही जा रही है। इसे नवंबर के दूसरे पखवाड़े में कैबिनेट के सामने पेश किए जाने की संभावना है। हालांकि, पेंशन बढ़ोतरी भी अभी प्रस्ताव के स्तर पर है और अंतिम फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही होगा।
सवा करोड़ से अधिक पेंशन लाभार्थियों को मिल सकता है फायदा
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 67 लाख से अधिक बुजुर्ग, 42 लाख से ज्यादा निराश्रित महिलाएं और करीब 12 लाख दिव्यांगजन पेंशन योजनाओं का लाभ लेते हैं। यदि पेंशन की राशि 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो प्रत्येक लाभार्थी को सालाना 6000 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। इससे प्रदेश के सवा करोड़ से अधिक संभावित लाभार्थियों को आर्थिक सहारा मिल सकता है।
फिलहाल, ग्राम प्रहरियों के मानदेय और सामाजिक पेंशन में बढ़ोतरी को लेकर अंतिम आधिकारिक फैसले का इंतजार है। यदि दोनों प्रस्ताव मंजूर होते हैं तो गांवों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के साथ-साथ बुजुर्गों, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजनों को भी आर्थिक राहत मिल सकती है।
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