नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए संसद के दोनों सदनों का सत्रावसान करने और सभी राजनीतिक दलों के साथ वास्तविक संवाद शुरू करने की मांग की है। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने पर भी जोर दिया है। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश के बयान से परिसीमन और चुनाव सुधारों को लेकर सियासी टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 60 दिन बाद भी उसका औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है। रमेश के मुताबिक, इससे पहले 2015 में मानसून सत्र के सत्रावसान में 28 दिन की देरी हुई थी, लेकिन इस बार यह अवधि उससे भी आगे निकल गई है।
रमेश ने केंद्र सरकार से मांग की कि संसद के दोनों सदनों का सत्रावसान गरिमापूर्ण तरीके से किया जाए और परिसीमन के भविष्य को लेकर सभी दलों के साथ गंभीर चर्चा शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष लंबे समय से इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने की मांग करता रहा है। कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन जैसे संवेदनशील विषय पर किसी भी निर्णय से पहले सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना जरूरी है।
कांग्रेस नेता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत जुटाकर परिसीमन से जुड़े विधेयकों को पारित कराने की कोशिश में सफल नहीं हो सकी। रमेश ने दावा किया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कई सहयोगी दलों ने भी इन विधेयकों का विरोध किया है। उनके अनुसार, विपक्षी दलों की एकजुटता और सत्ता पक्ष के कुछ सहयोगियों के रुख ने सरकार की रणनीति को चुनौती दी।
जयराम रमेश ने 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए दावा किया कि विपक्ष की एकता के कारण सरकार को झटका लगा था। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों में मतभेद पैदा करने की कोशिशों के बावजूद उनकी एकजुटता कायम है। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को सरकार की राजनीतिक रणनीति के लिए बड़ा झटका बताया है।
कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। रमेश ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को निलंबित करने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रणाली में जनता का विश्वास कमजोर हुआ है और इसे बहाल करने के लिए पारदर्शी कदम उठाने की आवश्यकता है।
कांग्रेस ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर फैसला राजनीतिक सहमति और व्यापक संवाद के आधार पर होना चाहिए। पार्टी का दावा है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कायम रखना सरकार की जिम्मेदारी है। जयराम रमेश ने भरोसा जताया कि अंततः संविधान की जीत होगी और जनता का संकल्प सफल होगा।
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