संसद गतिरोध पर आमने-सामने खरगे और नड्डा, लोकसभा-राज्यसभा विवाद से ठप हुई कार्यवाही
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बजट सत्र के दौरान संसद गतिरोध एक बार फिर केंद्र में आ गया है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के बीच लोकसभा की कार्यवाही पर चर्चा को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। खरगे ने कहा कि संसद का अर्थ केवल लोकसभा नहीं, बल्कि लोकसभा और राज्यसभा—दोनों सदन हैं। ऐसे में जब लोकसभा में विपक्ष के नेता देशहित के मुद्दों पर बोलना चाहते हैं और उन्हें अवसर नहीं दिया जाता, तो संसद गतिरोध के हालात बनते हैं और सदन चलाना कठिन हो जाता है।
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राज्यसभा में नियमों का हवाला, नड्डा का पलटवार
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि लोकसभा की कार्यवाही पर राज्यसभा में चर्चा नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को चर्चा करानी है तो अपनी पार्टी के सदस्यों से लोकसभा में चर्चा कराने को कहें। नड्डा ने यह भी जोड़ा कि राज्यसभा में चर्चा सुव्यवस्थित ढंग से चल रही है और इसे बाधित न किया जाए। इस तर्क-वितर्क के बीच संसद गतिरोध की तस्वीर और गहरी होती दिखी।
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लोकसभा में हंगामा, कार्यवाही स्थगित
उधर, लोकसभा में पिछले कुछ दिनों से जारी संसद गतिरोध गुरुवार सुबह भी बना रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होने के एक मिनट के भीतर ही शोर-शराबे के चलते दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार की घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस तरह विपक्षी सदस्य सत्तापक्ष के वेल तक पहुंचे, वह सदन की मर्यादा के प्रतिकूल है।
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अध्यक्ष ओम बिरला की सख्त टिप्पणी
अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदन की मर्यादा बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मर्यादा भंग होने पर अध्यक्ष के लिए कार्यवाही चलाना उचित नहीं होता। उन्होंने सभी सदस्यों से शालीनता और नियमों के अनुरूप व्यवहार करने की अपील की। इसके बावजूद हंगामा जारी रहा, जिससे संसद गतिरोध के कारण विधायी कार्य प्रभावित हुआ।
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राजनीतिक संदेश और आगे की राह
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह टकराव केवल प्रक्रिया का नहीं, बल्कि संवाद के अभाव का संकेत है। यदि दोनों सदनों में समन्वय और संवाद नहीं बढ़ा, तो संसद गतिरोध का असर महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे पर पड़ सकता है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है कि सरकार और विपक्ष, दोनों मिलकर सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने की दिशा में कदम उठाएं।
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