भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए साक्षरता बेहद ज़रूरी- राजेश खुराना

आगरा(राष्ट्र की परम्परा) विश्व साक्षरता दिवस हर वर्ष सितम्बर माह में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य दुनियाभर में शिक्षा के महत्व को दर्शाने और निरक्षरता को समाप्त करना और लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना है।
विश्व सारक्षता दिवस के अवसर पर राष्ट्रवादी सामाजिक चिंतक राजेश खुराना ने इस सन्दर्भ में कहा कि आइए इस बार विश्व साक्षरता दिवस पर नयी शुरुआत बताने या समझाने से नहीं, समझने से करते हैं। एक नई शुरुआत हम खुद से करते हैं और इस साक्षरता दिवस पर प्रण करते हैं, कि हम हर बच्चे, बच्ची, महिला और व्यक्ति को साक्षर बनाने के लिए गरीब बस्तियों में जाकर साक्षरता की अलख जगाने का प्रयास करेंगे। क्योंकि कोई जरूरी नहीं है,कि इसके लिए हमें कोई बड़े काम से शुरुआत करनी हो। क्योंकि आहुतियां छोटी ही होती है, लेकिन यज्ञ का महत्व और उद्देश्य बड़ा होता है। ठीक वैसे ही हमारी छोटी-छोटी कोशिशें भी कई बार बड़ा आकार लेने में सक्षम होती हैं। इसलिए हमारे और समाज का शिक्षित होना बेहद जरूरी है। किसी भी समाज में बदलाव अपने आप नहीं आते बल्कि बदलाव लाए जाते हैं। बदलाव और सुधार बिना शिक्षा के संभव नहीं है। हमारे देश में सिंबल ऑफ़ नॉलेज़ विश्वरत्न डॉ बीआर अम्बेडकर जैसे महान नायक हुये जिन्होंने सिर्फ शिक्षा के दम पर हमारे स्वतंत्र भारत का संविधान लिख दिया और साथ ही समाज क़ी ज़िन्दगी भी बदल दी। इसलिए भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए साक्षरता बहुत ज़रूरी हैं। क्योंकि शिक्षा, रोजगार या पैसे से ज्यादा खुद के विकास के लिए बेहद जरूरी होती हैं। साक्षरता की ताकत समाज के साथ – साथ देश के विकास की नींव को मजबूत करती हैं। साक्षरता बेहतर जीवन जीने में ही नहीं बल्कि गरीबी मिटाने में भी मदद करती हैं। हमने जो सोचा नहीं होगा वो हम शिक्षा के माध्यम से वो सब प्राप्त कर सकते हैं। हमारे देश की आने वाली पीढ़ी का शिक्षित होना उनके उज्जवल भविष्य के लिए ज़रूरी है। शिक्षा हमारे अंदर अच्छे विचारों को लाती है और बुरे विचारों को बाहर करती है। शिक्षा मनुष्य के जीवन का मार्ग दिखाती है। यह मनुष्य को समाज में प्रतिष्ठित काम करने के लिए प्रेरणा देती है। इसलिए ज्ञान के प्रकाश से ग़रीब वंचित तबके को इस महत्वपूर्ण बात का एहसास कराएं कि शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती। अगर हम आप अपने क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर कोई छोटा सा समूह बनाकर उसके स्कूल जाने की व्यवस्था जरूर कर सकते हैं। इतना ही नहीं अपना कुछ वक्त निकाल कर उन ग़रीब, पिछड़े क्षेत्रों व लोगों के बीच शिक्षा के महत्व को साझा भी कर सकते हैं। जहां शि‍क्षा से जरूरी, मजदूरी और ज्ञान से जरूरी भोजन होता है। इसलिए आप कम से कम मोदी सरकार की शिक्षा संबंधी योजनाओं की जानकारी तो बांट ही सकते हैं। जो आपके छोटे से प्रयास से अंधकारमय जीवन में एक नया दीपक जला सकती है। क्योंकि शिक्षा, रोजगार या पैसे से ज्यादा खुद के विकास के लिए बेहद जरूरी है। खास मायने में विश्व साक्षरता दिवस शिक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और लोगों का ध्‍यान शिक्षा की तरफ आकर्षित करने के साथ ही उन्हें सही शिक्षा के संस्कार देना बेहद जरूरी है। तथा शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, सभी भारतीयों को चाहिए कि वे सिर्फ साक्षर ना बनें, बल्कि राष्ट्रहित में नये भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति संकल्पित होकर एक अच्छे देश के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए।खुराना ने आगे कहा कि – शिक्षा जीवन का मूल आधार हैं। हमने जो सोचा नहीं होगा शिक्षा के माध्यम से हम वो सब प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए सभी से अपील हैं कि सभी अपने बच्चों को शिक्षा अवश्य दिलवाएं। शिक्षा सब का मौलिक अधिकार हैं। भारतीय संविधान में शिक्षा को मौलिक अधिकार के तहत रखा गया हैं। वहीं, भारतीय संविधान में ऐसी व्यवस्था हैं। जिसके आधार पर 6 से 14 वर्ष के बच्चे को विल्कुल निःशुल्क शिक्षा की बात कही गयी हैं। शिक्षा समाज की प्रगति और उन्नति का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ होती हैं। क्योंकि साक्षर और शिक्षित व्यक्ति ही परिवार, समाज और देश में सकारात्मक बदलाब ला सकते हैं और उन्नति की दिशा में अग्रसर हो सकते हैं। साक्षरता यानी व्यक्ति की विभिन्न योग्यताओं के साथ – साथ बेहतर शिक्षा होना हैं। शिक्षा ना केवल अक्षरों की पहचान होती हैं, यह व्यक्ति को उसके अधिकारों और कर्तव्यओं की भी उचित जानकारी प्रदान करती हैं। विना सक्षरता के व्यक्ति ना केवल अपने अधिकारों की अवगति नहीं कर पाता बल्कि परिवार और समाज की उन्नति में भी योगदान नहीं कर सकता। साक्षरता का महत्व सिर्फ़ व्यक्ति के व्यक्तिगत विकास में ही नहीं बल्कि परिवार और समाज के समाजिक और आर्थिक विकास में भी होता हैं। शिक्षित व्यक्ति समाज में अधिक जागरूक, सकारात्मक और राष्ट्रहित में समर्पित भागीदार बनते हैं। उन्हें ना केबल स्वयं की संवृद्धि की पर्याप्त जानकारी होती हैं बल्कि उन्हें अपने समाज के मुद्दों के प्रति भी जागरूकता होती हैं। और वह समाज में सुधारों के लिए सक्रिय रूप से निष्पक्ष काम करते हैं। ‘पढ़ने लिखने का ज्ञान वो शक्ति हैं, जो सशक्त समाज व राष्ट्र का निर्माण करती हैं। साक्षरता की ताकत किसी भी घर, परिवार और समाज के साथ उस देश के सम्पूर्ण विकास की नींव को मजबूत करती हैं। साक्षरता ना केवल लोगों को बेहतर जीवन जीने में मदद करती हैं बल्कि ग़रीब की गरीबी मिटाने में भी मदद करती हैं। इसीलिए लोगों को साक्षर होने के और सामाजिक और मानव विकास के अपने अधिकारों को जानने की जरूरत के बारे में जागरूक होने की जरूरत हैं। क्युकी शिक्षा वह धन है, जिसे न तो बाँटा जा सकता है और न तो चुराया जा सकता है। शिक्षा बाँटने से कभी कम नहीं होती है। इसलिए सभी पढ़े सभी बढ़े। सिर्फ़ शिक्षा ही वह धन हैं, जो बाँटने से कभी भी कम नहीं होता। शिक्षित होंगे सभी भारतीय जन तभी विकसित होगा हमारा वतन। इसलिए इस विश्व सारक्षता दिवस पर सभी भारतीय जन संकल्प लें कि राष्ट्रहित में नये भारत को जल्द पूर्ण साक्षर देश बनाएंगे।

Editor CP pandey

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