मेरी रचना, मेरी कविता
—X—
हम राही हैं उस मंज़िल के,
विधना ने जिसे बनाया है,
राहें पथरीली या फूल सजी,
ईश्वर ने हमें दिखाया है ।
इन राहों पर ही चलकर,
जीवन यात्रा पूरी होगी,
भटक गए यदि भाई मेरे,
मुक्ति यात्रा अधूरी होगी ।
कभी कभी खिड़की, दरवाज़े,
हैं बंद हमें जब ऐसा लगता है,
शायद कोई तूफ़ान हो बाहर,
जिससे वह हमें सुरक्षित रखता है।
वह जो भी जैसा भी करता है,
सब अच्छे के लिए ही करता है,
आस्था रखिए उसकी कृति पर,
अद्भुत ममता वह रखता है।
ओ बन्दे जीवन अति छोटा है,
आओ मिल कर जीना सीखें,
प्रेम सुलभ सारे जग का कर,
हम शांति से रहना सीखें ।
नफ़रत, ईर्ष्या, द्वेष त्याग दें,
यह मानव मन के दुर्गुण हैं,
क्रोध, कपट व दम्भ मिटा दें,
प्रेम ही अनुपम सद्गुण हैं ।
डरना तो अति कायरता है,
सामना करें इसका डट कर,
स्वछंद जिया जाये जीवन,
बेबाक़ और निडर बन कर।
यादें तो बीते जीवन की,
अति सुंदर व सुखद होतीं हैं,
आदित्य भाग्यशाली, जिसके,
जीवन में सुख-शांति होती है।
कर्नल आदि शंकर मिश्र, ‘आदित्य’, लखनऊ
सत्यवती मिश्रा के निधन से शोक की लहर, दलीय सीमाएं भूल श्रद्धांजलि देने पहुंचे नेता…
दर्शक, कमाई और पहचान हिंदी की, सितारों की जुबान अंग्रेजी...! हिन्दी दिवस विशेष व्यंग्य अपनी…
हिंदी दिवस 2026: अनुच्छेद 343 से राजभाषा कानून तक हिंदी का संवैधानिक सफर, एडवोकेट किशन…
तरुअनवां में क्रॉस कंट्री दौड़ में धावकों ने दिखाया दम कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। फाजिलनगर…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। आमजन की सुरक्षा, पुलिस-जन संवाद को मजबूत करने और महिला एवं…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। भलुअनी थाना क्षेत्र के गांधीनगर वार्ड में 23 वर्षीय मनीष सिंह…