बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के किशोर चेतन किशोर गांव में भूमि विवाद का मामला अब प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। जिलाधिकारी बलिया द्वारा मौके का निरीक्षण कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद जमीन पर जबरन जोताई कर गेहूं की बोआई करने वालों पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे पीड़ित के साथ-साथ ग्रामीणों में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्राम संठी चतुर, थाना व तहसील सिकंदरपुर निवासी रामप्रवेश राय पुत्र खेदन राय का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2008 में मौजा किशोर चेतन की आराजी संख्या 478, रकबा 0.069 हेक्टेयर भूमि का विधिवत बैनामा कराया था। आरोप है कि किशोर चेतन निवासी परशुराम चौबे, गुड्डू चौबे, सोनू चौबे, मन्नू चौबे और पिंटू चौबे ने 21 नवंबर 2025 की रात अवैध रूप से उनकी भूमि जोतकर उसमें गेहूं की बोआई कर दी।
पीड़ित ने बताया कि उसने नियमानुसार सरकारी शुल्क जमा कराकर भूमि का सीमांकन कराया था, लेकिन 30 अक्टूबर 2025 को विपक्षियों ने सीमांकन का सरकारी पत्थर उखाड़कर फेंक दिया। इस मामले में 31 अक्टूबर और 15 नवंबर को तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र देने के बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित का आरोप है कि क्षेत्रीय लेखपाल वह कानूनगो की रिपोर्ट में वास्तविक स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया। एक कोने पर पत्थर के स्थान पर ईंट गड़ी मिलने के बावजूद सरकारी चिन्ह उखाड़ने वालों के खिलाफ न तो प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही अन्य विधिक कार्रवाई की गई। रामप्रवेश राय ने जिलाधिकारी से पुनः मांग की है कि उनके आदेश का अनुपालन कराते हुए मौके का निरीक्षण कराया जाए और जबरन खेती करने तथा सरकारी सीमांकन चिन्ह हटाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। मामले को लेकर तहसील क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और प्रशासन की भूमिका पर लोग सवाल उठा रहे हैं।
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