मेलों की भीड़ में कितने भी हों,
पर पहचाने कोई कोई जाते हैं,
दुनिया में लाखों के मेले लगते हैं,
पर हंस उड़ते हैं तो अकेले उड़ते हैं।
संत और बसंत एक समान होते हैं,
जैसे जब संत का आगमन होता है,
तो हमारा समाज सुधर जाता है,
वसंत आने से संसार खिल जाता है।
किसी को क्षमा करने का यह अर्थ
नहीं होता कि उसे स्वीकार किया है,
न उसका व्यवहार स्वीकार होता है,
न उसका विश्वास किया जाता है।
उसे क्षमा इसलिए किया जाता है,
क्योंकि स्वयं को आगे बढ़ना है,
जीवन सरल व सादा रखना है,
आदित्य जटिलता रहित जीना है।
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