देशभर में जन्माष्टमी का उल्लास, मथुरा-वृंदावन में छाया भक्ति का रंग

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) पूरे देश में शनिवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कृष्ण जन्मभूमि मथुरा और वृंदावन में उत्सव का विशेष रंग देखने को मिला, जहां लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से आकर भगवान के दर्शन और लीलाओं का आनंद लेते नजर आए।

मथुरा-वृंदावन में अद्भुत दृश्य
भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में दिनभर भजन-कीर्तन, रासलीला और झांकियों का आयोजन हुआ। रात 12 बजे भगवान के प्राकट्य के क्षण को देखने के लिए श्रद्धालुओं में अपार उत्साह था। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट, फूल-बत्ती की रोशनी और भव्य झांकियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में भी जन्माष्टमी की धूम रही, जहां भक्त मंडलियों ने मधुर भजनों से माहौल को कृष्णमय कर दिया।

देश के विभिन्न हिस्सों में उत्सव का रंग
राजस्थान के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में सुबह मंगला दर्शन के साथ उत्सव की शुरुआत हुई। ठाकुरजी को दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से पंचामृत स्नान कराया गया। रात 12 बजे कान्हा के जन्म के उपलक्ष्य में 21 तोपों की सलामी दी जाएगी, जिसके बाद पुनः पंचामृत स्नान और विशेष आरती होगी।

महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई में पारंपरिक दही हांडी महोत्सव का आयोजन हुआ, जिसमें युवाओं की टोलियों ने मानव पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ने की प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। गुजरात के द्वारका मंदिर में भगवान द्वारिकानाथ का भव्य स्नान, अभिषेक और शृंगार आरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित इस्कॉन मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर प्रांगण में भजन-कीर्तन, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर चलता रहा, वहीं विदेशी श्रद्धालु भी पारंपरिक परिधानों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में सम्मिलित हुए।

भक्ति और उल्लास का संगम
देश के कोने-कोने में जन्माष्टमी पर्व ने आस्था, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। चाहे उत्तर की मथुरा-वृंदावन हो, पश्चिम का नाथद्वारा और द्वारका, दक्षिण का बेंगलुरु हो या फिर पश्चिमी तट की मुंबई—हर जगह भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव ने लोगों को भक्ति और आनंद में डुबो दिया।

Editor CP pandey

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