पूर्वांचल का मिनी बाबा धाम के नाम से प्रसिद्ध है इटहिया शिव मन्दिर

नेपाल के त्रिवेणी संगम तट से गंगा जल लेकर शिव को अर्पित करते हैं श्रद्धालु

मेले की तैयारी में जुटा जिला प्रशासन , सोमवार से शुरू होगी भीड़

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। मिनी बाबा धाम के नाम से विख्यात प्रसिद्ध शिव मंदिर इटहियां के पंचमुखी शिवलिंग के इतिहास के संबंध में पुराणों में कोई उल्लेख नहीं मिलता है। लेकिन जनश्रुतियों के अनुसार इस पंचमुखी शिवलिंग के प्रादुर्भाव। की कहानी निचलौल स्टेट के राजा बृषमसेन के साथ जुड़ी हुई है प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद के निचलौल तहसील क्षेत्र के अन्तर्गत पंचमुखी शिवलिंग इटहियां के ऐतिहासिकता के संदर्भ में स्थानीय लोगों एवं जनश्रुतियों के अनुसार राजा बृषमसेन अत्यन्त ही प्रतापी एवं न्याय प्रिय राजा थे। वह भगवान शंकर के अनन्य भक्त थे उनके गौशाला में एक नन्दनी नाम की गाय थी। इसे राजा बहुत मानते थे तथा सुबह शाम उसका दर्शन करते थे तथा उसी के दूध का सेवन भी करते थे।उस समय इटहियां सहित यह समूचा क्षेत्र घने जंगलों से आच्छादित था। नन्दनी गाय उसी जंगल में घास चरती थी। कुछ दिन के बाद नन्दनी ने दूध देना बन्द कर दिया और अपना दूध जंगल के घने झाड़ियों में जमीन पर चढ़ाने लगी।
जब राजा बृषमसेन को यह जानकारी हुई तो उन्होंने उक्त स्थान पर खुदाई कराया। वहां एक पंचमुखी शिवलिंग मिला इसे देख कर राजा भाव विह्वल हो गए तथा पंचमुखी शिवलिंग का राजा प्रतिदिन सर्व प्रथम पूजा अर्चना करने लगे इसके परिणाम स्वरूप राजा को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई इसका नाम रत्नसेन पड़ा। राजा बृषमसेन की मृत्यु के बाद उनके पुत्र रत्नसेन निचलौल के राजा हुए तथा अपने पिता की तरह अपनी पत्नी स्वर्ण रेखा के साथ प्रतिदिन पंचमुखी शिवलिंग की पूजा अर्चना किया करते थे।
राजा रत्नसेन के शासन काल में एक दिन कुछ चोर रात्रि में चोरी के उद्देश्य से राज्य में प्रवेश कर रहे थे। जब वे पंचमुखी महादेव मंदिर के सामने पहुंचे तो मन्दिर के अन्दर से आवाज आई कि गांव वालों जागो चोर चोरी करने गांव में आ गए हैं। इससे गांव के लोग जग गए और चोर भाग गए।
पंचमुखी शिवलिंग पर गड़ौरा निवासी स्व. चन्द्रशेखर मिश्र ने 1968-69 में मन्दिर का निर्माण कराया जो वर्तमान में मौजूद है। यह मन्दिर अनेक चमत्कारी घटनाओं से जुड़ा हुआ। श्रद्धालुओं द्वारा मांगे गए मुरादों को पंचमुखी महादेव शीघ्र पूरा करते हैं। श्रद्धालुओं की मनौती पूर्ण होने और आस्था का केन्द्र होने के कारण अब लोगों ने इस मन्दिर को मिनी बाबा धाम के संज्ञा दे दी है। इसलिए यहां श्रावण मास में पूरा एक माह मेला लगता है। लाखों श्रद्धालु पड़ोसी राज्य विहार व नेपाल से भी आते हैं। और जलाभिशेष व पूजा अर्चना करते हैं। पूरा श्रावण मास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रहती है।नेपाल के त्रिवेणी संगम तट से गंगा जल लेकर शिव को अर्पित करते हैं श्रद्धालु।
मिनी बाबा धाम के नाम से विख्यात प्रसिद्ध शिव मंदिर इटहियां के पंचमुखी शिवलिंग पर श्रद्धालुओं की भीड़ बड़ी संख्या में देखने को मिलता है जो लाखों श्रद्धालु पड़ोसी राज्य विहार व नेपाल सहित कुशीनगर, सिद्धार्थनगर , देवरिया, बस्ती, आदि से नेपाल में स्थित त्रिवेणी संगम तट से गंगा जल लेकर शिवलिंग पर जलाभिशेष व पूजा अर्चना करते हैं। साथ ही साथ श्रावण मास में अधिकांश लोग रुद्राभिषेक करते नजर आते हैं।

rkpNavneet Mishra

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