रसोई से इलाज तक बढ़ता खर्च, घरेलू बजट पूरी तरह बेहाल
डॉ. सतीश पाण्डेय
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। देश में महंगाई को लेकर सरकारी स्तर पर भले ही संतुलन और नियंत्रण के दावे किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आती है। सरकारी आंकड़ों में महंगाई दर नियंत्रित दिख सकती है, पर आम आदमी की रसोई और बाजार की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं के दाम बढ़ने से हर वर्ग का घरेलू बजट चरमरा गया है।
महंगाई की सबसे सीधी और गहरी मार रसोई पर पड़ी है। दाल, चावल, आटा, खाद्य तेल, सब्जियां, दूध और मसाले जैसी जरूरी वस्तुएं आम परिवार की पहुंच से धीरे-धीरे बाहर होती जा रही हैं। महीने की शुरुआत में तैयार किया गया बजट, महीने के बीच में ही जवाब दे देता है। मध्यम वर्ग खर्चों में कटौती कर किसी तरह संतुलन बना रहा है, जबकि गरीब और दिहाड़ी मजदूर वर्ग के लिए जीवन यापन लगातार कठिन होता जा रहा है।
महंगाई का असर केवल खाने-पीने तक सीमित नहीं है। बच्चों की शिक्षा, निजी स्कूलों की बढ़ती फीस, किताबें, इलाज का खर्च, दवाइयां, बिजली-पानी के बिल, मकान किराया और परिवहन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाएं आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। ईंधन की कीमतों में वृद्धि का सीधा प्रभाव हर वस्तु और सेवा पर पड़ रहा है।
ये भी पढ़ें – मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान के तहत पुलिस ने किया आमजन से संवाद, 357 व्यक्तियों व 198 वाहनों की हुई जांच
ग्रामीण इलाकों में भी हालात चिंताजनक हैं। खेती की लागत—खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी—लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों की आमदनी अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है। शहरों में रोजगार की अनिश्चितता और बढ़ते खर्चों ने युवाओं के सामने भविष्य की नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
महंगाई का एक गंभीर दुष्परिणाम यह भी है कि लोगों की बचत घटती जा रही है और कर्ज पर निर्भरता बढ़ रही है। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए लोग उधार और ऋण लेने को मजबूर हैं।
स्पष्ट है कि महंगाई केवल आंकड़ों तक सीमित विषय नहीं, बल्कि हर घर की वास्तविक समस्या है। नीतियों की सफलता तभी सार्थक मानी जाएगी, जब उसका प्रभाव आम आदमी की थाली, जेब और जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई दे। जब तक रसोई का खर्च काबू में नहीं आता और आय के साधन मजबूत नहीं होते, तब तक महंगाई की मार घर-घर महसूस होती रहेगी।
ये भी पढ़ें – पुलिस ने चलाया स्वच्छता अभियान, श्रमदान से दिया स्वच्छ पर्यावरण का संदेश
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के ग्राम बथनी बाबू क्षेत्र में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था…
300 वर्ष पुराने बाबा बैजूनाथ धाम मंदिर का हिस्सा ढहा, श्रद्धालुओं में गहरा दुख; प्रशासन…
डीएम ने दिए सघन जांच के निर्देश, बाल श्रमिक मिलने पर होगी कड़ी कार्रवाई महराजगंज(राष्ट्र…
शोक की लहर दो मिनट मौन रख दी गई श्रद्धांजलि गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)कलेक्ट्रेट में तैनात…
अपने दरवाजे पर खड़ी गाड़ी हो तो आपत्ति, सार्वजनिक परिसर में क्यों नहीं? गोरखपुर(राष्ट्र की…
डीएम ने अनाथ बहनों के भविष्य संवारने की पहल की देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी…