नई दिल्ली, (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारत ने पाकिस्तान के साथ छह दशक पुरानी सिंधु जल संधि को बहाल करने से साफ इनकार कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब भारत इस पानी का उपयोग अपने आंतरिक विकास कार्यों और जरूरतों के लिए करेगा। उन्होंने कहा, “हम नहर बनाकर पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को राजस्थान में ले जाएंगे। पाकिस्तान को वह पानी नहीं मिलेगा जो उसे अनुचित तरीके से मिल रहा है।”
यह बयान उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक विशेष साक्षात्कार के दौरान दिया, जिसमें उनसे 1960 में हुई सिंधु जल संधि की वर्तमान स्थिति के बारे में सवाल किया गया था।
⛔ पाकिस्तान को नहीं मिलेगा सिंधु का पानी
साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि के तहत भारत ने छह नदियों में से तीन – रावी, ब्यास और सतलुज – पर अधिकार बनाए रखा, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान को दिया जाता रहा।
हालांकि, 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद भारत ने इस संधि को “स्थगित” कर दिया।
सरकार ने यह निर्णय पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के कारण लिया था। इस हमले के बाद भारत ने सैन्य ऑपरेशन ‘सिंदूर’ चलाकर कई आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया था।
📨 पाकिस्तान ने की संधि बहाल करने की गुहार
तब से पाकिस्तान लगातार भारत से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील कर रहा है। पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तज़ा ने भारत के जल शक्ति मंत्रालय को अब तक कम से कम चार पत्र लिखे हैं, जिनमें से तीन ऑपरेशन सिंदूर के बाद भेजे गए हैं।
लेकिन अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब इस पानी का उपयोग खुद करेगा, जिससे राजस्थान जैसे जल संकट झेल रहे राज्यों को लाभ मिलेगा।
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