इंदारा–दोहरीघाट रेलखंड: आमान परिवर्तन के बाद भी आस अधूरी

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के इंदारा–दोहरीघाट रेलखंड पर आमान परिवर्तन के बाद भी अपेक्षित सुविधाएं न मिलने से क्षेत्र की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। इस रेलमार्ग पर वर्तमान में केवल एक ही यात्री ट्रेन का संचालन हो रहा है, वह भी दोपहर के समय, जिससे व्यापारी, बुनकर, किसान और रोजमर्रा आवागमन करने वाले लोगों को कोई खास लाभ नहीं मिल पा रहा है। जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों द्वारा लगातार मांग उठाने के बावजूद अब तक केवल आश्वासन ही दिया जा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, आमान परिवर्तन से पहले इस रेलखंड पर रेल बस का संचालन किया जाता था, जो दिनभर में लगभग छह फेरे लगाती थी। इससे व्यापारियों, बुनकरों, किसानों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को आवागमन में काफी सुविधा मिलती थी। लंबे संघर्ष के बाद इंदारा जंक्शन से दोहरीघाट तक रेलखंड का आमान परिवर्तन किया गया। करीब दो वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश सरकार के नगर विकास मंत्री द्वारा इस रेलखंड पर ट्रेन संचालन का शुभारंभ किया गया था, जिससे क्षेत्रवासियों में बड़ी उम्मीद जगी थी।

हालांकि, आमान परिवर्तन के बाद सुविधाओं में विस्तार के बजाय कटौती होती नजर आ रही है। वर्तमान समय-सारिणी के अनुसार, यह एकमात्र ट्रेन मऊ जंक्शन से लगभग 11 बजे दिन में चलकर इंदारा जंक्शन होते हुए दोहरीघाट पहुंचती है। वहीं, दोहरीघाट से यह ट्रेन दोपहर करीब एक बजे इंदारा और मऊ होते हुए प्रयागराज के लिए रवाना होती है। इस समय-सारिणी के चलते रेलखंड के छोटे-बड़े स्टेशनों की लगभग आधी आबादी को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि इस एकमात्र ट्रेन का समय ऐसा है कि विद्यार्थी, किसान, बुनकर और छोटे व्यापारी अपनी दैनिक जरूरतों के लिए इसका उपयोग नहीं कर पाते। विशेष रूप से सुबह के समय कोई ट्रेन न होने से जिला मुख्यालय जाने वाले मरीजों, न्यायालय और तहसील में कार्य से जुड़े लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

लोगों की मांग है कि यदि दोहरीघाट से सुबह करीब नौ बजे एक डाउन ट्रेन का संचालन किया जाए, तो विद्यार्थियों, छोटे व्यापारियों, सरकारी कर्मचारियों और बुनकरों को बड़ी राहत मिल सकती है। बुनकर बाहुल्य क्षेत्र घोसी, कोपागंज, अदरी और मऊ के लोगों के लिए समय पर बाजार और जिला मुख्यालय पहुंचना आसान हो सकेगा।

रेलखंड से जुड़े गांवों और कस्बों के लोगों ने एक बार फिर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि आमान परिवर्तन का वास्तविक लाभ तभी मिल पाएगा, जब यात्रियों की जरूरत के अनुसार समय-सारिणी तय कर अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन किया जाए। फिलहाल जनप्रतिनिधियों द्वारा मुद्दा उठाए जाने पर केवल आश्वासन ही मिल रहा है, जिससे जनता में निराशा बढ़ती जा रही है।

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Karan Pandey

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