यूपी विधानसभा शीतकालीन सत्र में ब्राह्मण विधायकों की बैठक, सामाजिक एकजुटता और पारिवारिक मूल्यों पर हुआ मंथन
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान ब्राह्मण समुदाय से जुड़े विधायकों ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें लगभग चार दर्जन विधायक शामिल हुए। यह बैठक पूरी तरह सामाजिक सरोकारों और समुदाय से जुड़ी जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रही। बैठक में मौजूद विधायक रत्नाकर मिश्रा ने स्पष्ट किया कि इस आयोजन का उद्देश्य किसी भी प्रकार की राजनीतिक रणनीति या असंतोष को व्यक्त करना नहीं था, बल्कि बदलते सामाजिक ढांचे पर गंभीर चर्चा करना था।
रत्नाकर मिश्रा ने कहा कि ब्राह्मण समाज आज तेजी से बिखराव की ओर बढ़ रहा है। पहले संयुक्त परिवारों की परंपरा मजबूत थी, जहां तीन पीढ़ियां एक साथ रहती थीं, लेकिन आधुनिक जीवनशैली और पश्चिमी प्रभाव के कारण अब परिवार छोटे होते जा रहे हैं। इसका सीधा असर बुजुर्गों पर पड़ रहा है, जो मजबूरी में वृद्धाश्रम जाने को विवश हो रहे हैं। उन्होंने इसे समाज के लिए चिंता का विषय बताया।
मिश्रा के अनुसार, बैठक का मूल उद्देश्य नई पीढ़ी को सही दिशा देना, सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना और परिवार व्यवस्था को मजबूत करना था। उन्होंने कहा कि समाज को मूल्य और संस्कृति देना ब्राह्मणों की ऐतिहासिक भूमिका रही है और यदि इसी उद्देश्य से कोई बैठक होती है तो उसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। बल्कि, हर समुदाय को अपनी सामाजिक मजबूती के लिए ऐसे संवाद करने चाहिए ताकि सभी भारत की मुख्यधारा से जुड़े रहें।
राजनीतिक अटकलों को खारिज करते हुए मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत है, माफिया राज समाप्त हो चुका है और प्रशासनिक व्यवस्थाएं बेहतर हैं, इसलिए राजनीतिक विमर्श की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक में विभिन्न दलों के विधायक थे या नहीं, इसकी उन्हें सटीक जानकारी नहीं है क्योंकि वे कुछ देर से पहुंचे थे।
वहीं, कुशीनगर से भाजपा विधायक और बैठक के आयोजक पी.एन. पाठक ने साफ कहा कि इस बैठक में केवल भाजपा के ब्राह्मण विधायक शामिल हुए और इसका कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था। उन्होंने मीडिया में चल रही उन खबरों को भी खारिज किया जिनमें ब्राह्मण समुदाय की नाराजगी की बात कही जा रही थी। पाठक के अनुसार, बैठक पूरी तरह सामाजिक उत्थान और कल्याण पर केंद्रित थी।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इससे पहले ठाकुर और कुर्मी समुदाय के विधायकों की बैठकें हो चुकी हैं, जिन्हें सकारात्मक पहल माना जाना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसे प्रयास सामाजिक संवाद और समरसता को मजबूत करते हैं।
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