बगैर फायर एनओसी और अग्निशमन सुरक्षा उपकरणो के चल रहे अवैध गेस्ट हाउस, होटलो पर कारवाई कब..?
मुम्बई(राष्ट्र की परम्परा)l कुर्ला एल विभाग के हद्द मे झोपडपट्टी व चालियो में सारे नियम कायदे को नजरअंदाज कर गेस्ट हाउस ,होटलो का अवैध धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। ये सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक हैं। मौजूदा समय में इनकी संख्या लगभग 500 से अधिक बताई जा रही है। इनकी वजह से आस-पड़ोस में रहने वाले रहिवासी महिलाये परेशान हो रही हैं। कुर्ला के ऐसे अनेको गेस्ट हाउस, होटल व डोरमेट्री को एल विभाग ने नोटिस दिए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पूरे कुर्ला शहर में फैल चुके अवैध गेस्ट हाउस ,होटल के नेटवर्क को तोड़ने के लिए सिर्फ नोटिस देना पर्याप्त है।
कुर्ला शहर में अवैध रूप से ऐसे नेटवर्क का जाल बिछ चुका है, जो लोगों को किराए पर एक-दो दिन या कुछ घंटों के लिए कमरा देते हैं। इन गेस्ट हाउस तक पहुंचने के लिए कई छोटी बड़ी ऑनलाइन कंपनियां लोगों को प्लैटफॉर्म उपलब्ध करा रही हैं। ये कंपनियां लोगों को मोबाइल ऐप या ऑनलाइन उनके बजट और जरूरत के हिसाब से किराए पर कमरा दिलाने का काम करती हैं। ऐसे सभी गेस्ट हाउस कुर्ला शहर मे अवैध तरीके से चल रहे हैं। इनका कहीं कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। बिना किसी आईडी प्रूफ व सुरक्षा की जांच किए बिना ये गेस्ट हाउस लोगों को कमरा उपलब्ध करा देते हैं। इन गेस्ट हाउस की मदद से तमाम तरीके के वैध-अवैध काम किए जा रहे हैं। अगर किसी के साथ कोई अप्रिय घटना हो जाए तो उसका जिम्मेदार कौन होगा, इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है।
उक्त अवैध गेस्ट हाउस मोबाइल ऐप के अलावा कुर्ला शहर के रिहायशी चालियो के इलाकों में चल रहे गेस्ट हाउस, होटल ऑनलाइन तरीके से बुक करवाए जाते हैं। इसके साथ ही गेस्ट हाउस संचालकों ने कॉरपोरेट कंपनियों से भी टाइअप कर रखा है, उनके यहां अन्य स्थानों से आने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों व मेहमानों को ठहराया जाता है। सूत्रों की मानें तो इन गेस्ट हाउसों के मालिक सरकारी ओहदों पर बैठे बड़े अफसर हैं या फिर नेताओं का इनमें पैसा लगा हुआ है। इस वजह से प्रशासन व पुलिस इन पर हाथ नहीं डालती है। कुर्ला शहर में इस तरीके से छोटे व बड़े चालीयो में करीब 500 से ज्यादा गेस्ट हाउस चल रहे हैं। इनके बढ़ते जाल और खतरे को देखते हुए नींद से जागे मनपाप्रशासन ने अब तक इनके खिलाफ कोई भी कार्यवाही नही की है।
सवाल यह उठता है की पूरे कुर्ला शहर में इतना बड़ा नेटवर्क विकसित हो गया और मनपा प्रशासन इससे बेखबर कैसे रह गया।
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