डिजिटल इंडिया का सपना साकार हुआ, तो सही मायनों में देश का हो जाएगा बेड़ा पार

डिजिटल इंडिया का

डिजिटल इंडिया का सपना अगर सच हो जाए, तो जो काम आज आम नागरिक के लिए सिरदर्द बने हुए हैं, वे चुटकियों में पूरे हो सकते हैं। यही भावना भारत की डिजिटल क्रांति की आत्मा है। डिजिटल इंडिया अभियान की शुरुआत देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने, सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और ऑनलाइन उपलब्ध कराने तथा आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से की गई थी। दस वर्षों के बाद, 2026 की शुरुआत में यह स्पष्ट दिखता है कि यह पहल कई अहम मुकाम हासिल कर चुकी है, हालांकि कुछ चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।2014 में जहां देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या मात्र 25 करोड़ थी, वहीं 2024 तक यह आंकड़ा 97 करोड़ से अधिक पहुंच गया। दुनिया में सबसे सस्ते डेटा दरों के कारण डिजिटल सेवाएं अब शहरों तक सीमित नहीं रहीं। भारतनेट परियोजना के माध्यम से 2.2 लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया, जिससे गांवों में पांच लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर्स स्थापित हुए और ग्रामीण-शहरी डिजिटल अंतर काफी हद तक कम हुआ।डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत ने अभूतपूर्व प्रगति की है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI ने देश में लेनदेन की संस्कृति ही बदल दी। हर महीने 1.2 अरब से अधिक ट्रांजेक्शन के साथ यह दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म बन चुका है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए 34 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचे, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी बल्कि करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये की बचत भी संभव हुई। कोविड-19 काल में CoWIN ऐप ने दो अरब से अधिक वैक्सीन डोज का डिजिटल प्रबंधन कर यह साबित कर दिया कि भारत बड़े स्तर पर तकनीक को सफलतापूर्वक लागू कर सकता है।स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी डिजिटल इंडिया ने मजबूत हस्तक्षेप किया। आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ आईडी से 50 करोड़ से अधिक नागरिकों को डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की सुविधा मिली। PM eVidya के तहत सैकड़ों टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से शिक्षा को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाया गया। DigiLocker में 7.5 अरब से अधिक दस्तावेज सुरक्षित किए गए, जबकि GeM पोर्टल ने सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाया। इसी डिजिटल माहौल ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, जहां एक लाख से अधिक स्टार्टअप्स और 114 यूनिकॉर्न्स भारत की नवाचार क्षमता का प्रमाण हैं।ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के तहत छह करोड़ से अधिक परिवारों को डिजिटल ज्ञान से जोड़ा गया। 220 से अधिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भारत ने वैश्विक स्तर पर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी अलग पहचान बनाई, जिसकी सराहना G20 जैसे मंचों पर भी हुई।इसके बावजूद डिजिटल इंडिया की राह पूरी तरह आसान नहीं रही। आज भी ग्रामीण आबादी का एक बड़ा हिस्सा विश्वसनीय इंटरनेट सुविधा से वंचित है। भारतनेट परियोजना का कार्य अपेक्षित गति से पूरा नहीं हो पाया और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं में भी कई जगह देरी देखी गई। प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर आधार और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सवाल उठते रहे हैं। साइबर फ्रॉड, डेटा लीक और तकनीकी खामियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि डिजिटल विस्तार के साथ मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य है। साथ ही, रोजगार सृजन और नीति क्रियान्वयन में देरी जैसी समस्याएं भी डिजिटल विकास के समानांतर ध्यान मांगती हैं।आने वाले समय में डिजिटल इंडिया को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए और मजबूत करने की आवश्यकता है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करना, डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों को जिम्मेदारी के साथ अपनाना जरूरी होगा। डिजिटल इंडिया एक्ट के माध्यम से AI, IoT और ब्लॉकचेन जैसे क्षेत्रों के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार किया जाना चाहिए। साथ ही, डिजिटल साक्षरता, ग्रामीण कनेक्टिविटी, मुफ्त Wi-Fi और मजबूत प्राइवेसी कानूनों पर विशेष जोर देना होगा।अंततः डिजिटल इंडिया केवल तकनीक का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समावेशी विकास की एक व्यापक सोच है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे। यदि यह सपना सही मायनों में साकार होता है, तो न केवल प्रशासन सरल होगा, बल्कि सचमुच देश का बेड़ा पार हो जाएगा।

rkpNavneet Mishra

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