Categories: कविता

रास्ता भी मिल गया

हे कृष्ण गोविंद, मेरे हरे मुरारे,
हे नाथ नारायण, हे वासुदेवाय,
हे हरये गोपालाय, हे वंशीधराय,
प्रणतक्लेशनाशाय, राधेनाथाय।

आपको सिरपर मुकुट पहने हुये,
हाथों में गदा और चक्र लिये हुये,
वसुदेवपुत्र, चतुर्भुज स्वरूप में ही,
श्रीकृष्ण रूप में देखना चाहता हूँ।

हे श्रीकृष्ण तुम ही आदि देव हो,
पुरातन पुरुष हो, इस संसार के
सबसे बड़े भण्डार के मालिक हो,
तुम ही सब कुछ जानने वाले हो।

तुम ही सब कुछ जानने योग्य हो,
तुम परमधाम, अद्वितीय स्थान हो,
तुमसे मैंने सम्पूर्ण ज्ञान पाया है,
अब मुझे रास्ता भी मिल गया है।

तुम्हारी महिमा, तुम्हारा प्रताप,
जग के कण-कण में व्याप्त है,
आदित्य मैं तुम्हारा कृपापात्र हूँ,
अब मुझे रास्ता भी मिल गया है।

  • डॉ.कर्नल
    आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
rkpnews@desk

Recent Posts

मकर संक्रांति: छतों से आसमान तक उत्सव की उड़ान

मकर संक्रांति 2026: लखनऊ और उत्तर प्रदेश में पतंगों के संग परंपरा, उत्सव और ज़िम्मेदारी…

1 hour ago

कैसे एक युद्ध ने भारत में अंग्रेजी राज की राह आसान कर दी

इतिहास की तारीखों में छिपे निर्णायक मोड़: युद्ध, संधि और साम्राज्यों का उदय-पतन इतिहास केवल…

2 hours ago

जन्मदिन विशेष: संघर्ष से सफलता तक की असली कहानियाँ

14 जनवरी: इतिहास में अमर हुए महान व्यक्तित्व, जिनका जन्म बदला भारत और दुनिया का…

3 hours ago

आज आपका मूलांक बदलेगा किस्मत की चाल?

🔮 अंक राशिफल 14 जनवरी 2026: आज आपका मूलांक बदलेगा किस्मत की चाल? पंडित सुधीर…

3 hours ago

आज का पंचाग कब करे यात्रा क्या न करें सम्पूर्ण जानकारी

आज का संपूर्ण हिंदू पंचांग (14/01/2026)वार: बुधवारतिथि: माघ कृष्ण पक्ष एकादशी (शाम 05:53 PM तक),…

3 hours ago

पशु अधिकार बनाम मानव जीवन: 20 जनवरी की सुनवाई से तय होगी भारत की सार्वजनिक सुरक्षा नीति

गोंदिया - भारत में आवारा कुत्तों का मुद्दा कोई नया नहीं है,लेकिन 13 जनवरी 2026…

4 hours ago