घर परिवार में गृह स्वामी व गृहिणी
सारे परिवार के उत्तरदायी होते हैं,
सुचारू रूप से घर – गृहस्थी चले,
घर के मुखिया ही जिम्मेदार होते हैं।
सनातन धर्म के सोलह संस्कार में
वैवाहिक बंधन भी एक संस्कार है,
यह पवित्र बंधन विशिष्ट संस्कार है,
पति-पत्नी तो सुख-दुख के साथी हैं।
पति-पत्नी दोनों एक बैलगाड़ी के
दो बहुत मज़बूत पहिये से होते हैं,
उनमें से कोई एक कमजोर हो जाये,
तो पारिवारिक गाड़ियाँ बेकार हैं।
आदित्य माता-पिता की समझदारी,
परिवार एक सूत्र में पिरोये रखती है,
ये परिवार के सुख-दुख के साथी हैं,
इनके बिना घर के आँगन सूने होते हैं।
डा. कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
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