झांसी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) झांसी जिले की एक अदालत ने मंगलवार को 80 वर्षीय बुजुर्ग समेत तीन लोगों को पत्नी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास और प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला करीब 11 साल पुराने बहुचर्चित हत्या कांड में सुनाया गया।
विशेष लोक अभियोजक विजय सिंह कुशवाहा के अनुसार, शहर कोतवाली क्षेत्र के झरना गेट निवासी सुदामा प्रसाद यादव ने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी विश्वा देवी से उनके पुत्र पद्मेंद्र, निहाल और ऐलान सिंह यादव थे, जबकि दूसरी पत्नी शिवा देवी का भी यह दूसरा विवाह था। सुदामा प्रसाद ने करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्ति का मुख्तारनामा (पावर ऑफ अटॉर्नी) शिवा देवी के नाम कर दिया था। इसी बात को लेकर पहली पत्नी के बेटे शिवा देवी से नाराज़ रहते थे।
घटना 4 जनवरी 2014 की शाम की है, जब शिवा देवी झरना गेट स्थित शनि मंदिर के बाहर फूल बेच रही थीं। तभी पद्मेंद्र और ऐलान मोटरसाइकिल से पहुंचे और गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। प्रारंभ में सुदामा प्रसाद ने ही दोनों बेटों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में शिवा देवी और उनके पहले पति की पुत्री संयोगिता के आवेदन पर सुदामा प्रसाद को भी साजिशकर्ता के रूप में आरोपपत्र में शामिल किया गया।
अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद नियाज अहमद अंसारी की अदालत ने गवाहों और सबूतों के आधार पर सुदामा प्रसाद यादव, पद्मेंद्र यादव और ऐलान सिंह यादव को हत्या एवं साजिश रचने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा दी। अदालत ने तीनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
यह फैसला झांसी के न्यायिक इतिहास में एक ऐसे मामले के रूप में दर्ज हुआ है, जिसमें पारिवारिक संपत्ति विवाद ने हत्या तक का रूप ले लिया और 11 वर्षों बाद पीड़िता को न्याय मिला।
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