बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
जिले में सरकार द्वारा 29 और 30 तारीख को दो दिन का अवकाश घोषित किए जाने के बावजूद कई प्राइवेट विद्यालयों का खुले रहना सवालों के घेरे में है। शासन का स्पष्ट निर्देश था कि ठंड और मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को कोई खतरा न हो। लेकिन इसके बावजूद निजी विद्यालय संचालक आदेशों को दरकिनार कर मनमानी पर उतर आए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की चुप्पी इस मनमानी को मौन समर्थन देती नजर आ रही है। अभिभावकों का कहना है कि जब सरकारी विद्यालयों में अवकाश का पूरी तरह पालन हो रहा है, तो प्राइवेट स्कूलों के लिए अलग नियम क्यों? छोटे-छोटे बच्चों को ठंड में स्कूल भेजने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार, कुछ निजी विद्यालय जिला स्तर के अधिकारियों के “वजन” और प्रभाव का हवाला देकर खुले रखे गए हैं। इससे आम जनता में यह संदेश जा रहा है कि कानून और आदेश केवल कमजोरों के लिए हैं, जबकि प्रभावशाली लोग उन्हें तोड़ने के लिए स्वतंत्र हैं। यह स्थिति न केवल शासन की साख पर सवाल खड़े करती है, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
अब सवाल यह है कि प्राइवेट विद्यालयों की यह मनमानी कब तक चलेगी? क्या जिला प्रशासन शासनादेश का कड़ाई से पालन कराएगा या फिर बच्चों की सुरक्षा और अभिभावकों की चिंता यूँ ही नजरअंदाज होती रहेगी? जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी तत्काल कार्रवाई करें और यह स्पष्ट करें कि नियम सभी के लिए समान हैं, चाहे वह सरकारी विद्यालय हो या निजी। तभी जनता का प्रशासन पर भरोसा कायम रह पाएगा।
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