देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
नागरी प्रचारिणी सभा के तत्वधान में होली मिलन एवं द्वितीय शनिवारीय काव्य गोष्ठी का आयोजन आचार्य परमेश्वर जोशी की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में आर. अचल पुलस्तेय एवं विशिष्ट अतिथि हरिलाल चौधरी उपस्थित रहे।
इस समारोह में उपस्थित श्रोताओं और अतिथियों को अबीर और गुलाल के साथ स्वागत किया गया।ततपश्चात अयोजित कवि गोष्ठी का शुभारंभ वीरेंद्र तिवारी, मधुर द्वारा सरस्वती वन्दना से हुआ। उसके बाद रवि नन्दन सैनी ने आओ हम सब खेले बसन्त भर भर के लोगो को गुदगुदाया कवि ओंकार तिवारी ने आया हु एक बार मुझे त्योहार कह देना कविता पढ़कर तालिया बटोरी। इसी क्रम कवि बृजेन्द्र नाथ त्रिपाठी द्वारा ” मैं वसंत हूँ ” सुनाकर श्रोताओं को आकर्षित किया। आगे कवि राम नगीना यादव, लालता प्रसाद चौधरी, वृजेन्द्र तिवारी, पार्वती देवी, नित्यानन्द आनन्द, सरोज पांडेय, आशुतोष तिवारी ने अपनी कविता सुनाकर गोष्ठी की गरिमा बढ़ाई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डां अचल पुलस्तेय ने होली पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि होली की शुरुआत भारतीय सभ्यता के साथ हुई। ऋग्वेद में होली को होला कहा गया है। उस होला से ही होरहा शब्द बना है । इस प्रकार यह पर्व कृषि से जुड़ा हुआ है। यह सृष्टि तापमान और नमी का सामंजस्य है। मनुष्य जीवन के लिए पच्चीस से बत्तीस के बीच का तापमान सबसे उत्तम होता है और फाल्गुन मास का तापमान इसी के बीच होता है। भारत के विभिन्न प्रांतों में अलग अलग परंपरायें है। हमें फाग को भारत के सम्पूर्ण सांस्कृतिक परंपराओं के साथ मनाने की जरूरत है।
आगे कवि इन्द्र कुमार दीक्षित ने कहा कि यह प्रकृति जड़ और चेतन का मिश्रण है। जब भी यह भाव प्रस्फुटित होता है होली होती है।
सभा के अध्यक्ष आचार्य परमेश्वर जोशी ने कहा कि होली रंग का त्योहार है। जीवन बदरंग नहीं होना चाहिए। इसमें उल्लास हो यही कामना है। उन्होंने आगत अतिथियों और श्रोताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डॉ हरिविलास् चौधरी, दयाशंकर कुशवाहा, श्याम जी,एम पी गोंड आदि कवियों ने अपनी रचना सुनाई। संचालन योगेन्द्र तिवारी ‘योगी’ ने किया। सभा के मंत्री डाॅ अनिल कुमार त्रिपाठी ने सबको पुनः आगमन के लिए निवेदन किया। अंत में राष्ट्र गान एवं फूलों की होली के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। इस अवसर पर सरोज कुमार पांडेय,श्वेतांक करण त्रिपाठी,राम नगीना यादव, गोपाल कृष्ण सिंह रामू, विजय प्रसाद, कौशल कुमार मिश्र, ऋषिकेश मिश्र, बृजेश पाण्डेय प्रबंधक, नित्यानंद आनन्द, वीरेन्द्र शुक्ल, राम प्रसाद पाठक, रवीन्द्र नाथ तिवारी, जगदीश उपाध्याय, पुष्कर, वृद्धि चन्द्र विश्वकर्मा, रजनीश गोरे, प्रदीप देव, बृजेन्द्र मिश्र आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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