उस्का बाज़ार में तीन सौ वर्षों से मनाई जा रही है ऐतिहासिक रामलीला

👆कलाकारों द्वारा रामलीला का होता है सजीव मंचन👆

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)02 सितम्बर..

सिद्धार्थनगर जिले के उस्का बाजार में विगत 300 वर्षों से रामलीला का सजीव मंचन किया जा रहा है जहां राम लक्ष्मण व माता जानकी महल से निकलकर नाव पर सवार होकर वन के लिए जाते हैं।

👉मेले में लगभग 35000 की संख्या में आते हैं श्रद्धालु

रविवार को श्री पौहारी आश्रम के महंत लाल बहादुर दास, पुजारी रमाकांत शुक्ल व हनुमानगढ़ी मंदिर के पुजारी राधेश्याम द्विवेदी के नेतृत्व में राम वन गमन का सजीव मंचन किया गया।
रामलीला मंचन के आयोजक पयोहारी आश्रम के महंत लाल बहादुर दास ने बताया कि विगत 300 वर्षों से यहाँ रामलीला का आयोजन होता है। लगभग छह पीढ़ियों से यहां रामलीला के मंचन का आयोजन किया जाता है। शुरुआती दौर में रामलीला मंचन मिश्रा इस्टेट के सहयोग से किया जाता था, धीरे धीरे बाजार के व्यवसायियों ने इसमें सहयोग करना शुरू किया, तबसे लगातार रामलीला का मंचन होता है। इस रामलीला की खास बात यह है यहां सब कुछ सजीव मंचन किया जाता है।

👉नगर में आज भी रामलीला का होता है सजीव मंचन

उसका बाजार में होने वाले रामलीला की खास बात यह है कि यहां कोई मंच या स्टेज नहीं बनाया जाता। यहां रामलीला का सजीव मंचन किया जाता है। जिस प्रकार भगवान श्री राम अपने अनुज लक्ष्मण व सीता के साथ वन में जाते हैं, उसी प्रकार वर्तमान समय में भी राम, लक्ष्मण व सीता नगर पंचायत से निकलकर नाव में सवार होकर वन की ओर जाते हैं। इसके अलावा अन्य सभी वृत्तांत का सजीव मंचन किया जाता है। इसी प्रकार रामजी लंका पर चढ़ाई करने के लिए काल्पनिक लंका राज्य (रामलीला मैदान) में जाते हैं जोकि बाजार से करीब 2 से 3 किलोमीटर दूर है और रावण का वध कर वापस पयोहारी आश्रम पधारते हैं। इसके बाद भरत मिलाप कार्यक्रम आयोजित होता है जहां भगवान श्रीराम नगर पंचायत रूपी अयोध्या नगर में भरत की अगवानी के बाद प्रवेश करते हैं। इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा भगवान राम की पूजा अर्चना व आरती की जाती है। रामलीला के मंचन में शहर के सभी व्यापारी व गणमान्य मौजूद रहते हैं। करीब दस दिनों के रामलीला मंचन का समापन भी यहीं होता है।आज भी यह मंचन लगभग 11 एकड़ भूमि में फैले रामलीला मैदान में किया जाता है। इस दौरान रावण के पुतले का दहन भी किया जाता है जिसमें भगवान श्री रामचंद्र हाथी पर सवार होकर रावण के पुतले का दहन करते हैं। इसके बाद हाथी द्वारा रावण के पुतले को कुचला जाता है।

👁️‍🗨️आश्रम के पुजारी रमाकांत शुक्ला ने बताया कि मेले में लगभग 30 से 35 हजार की संख्या में भीड़ इकट्ठी होती है। इसके अलावा लगभग 3000 छोटी बड़ी दुकाने मेले में लगती है।👁️‍🗨️

👉मेले में सुरक्षा के होते हैं कड़े इंतजाम

रामलीला मैदान रेलवे ट्रैक से एकदम सटा हुआ है। यहां प्रशासन की मुस्तैदी हमेशा रहती है। कुल 20 पुलिसकर्मी मेले की सुरक्षा में लगे हुए हैं जिसमें पंद्रह आरक्षी, तीन एसआई, दो एसओ सहित कुल 20 पुलिसकर्मियों द्वारा मेले की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा रेलवे प्रशासन को भी सूचित कर दिया गया है। स्टेशन से कोल्हुआ ढाला तक लगभग 5 किलोमीटर तक की दूरी में गाड़ी की रफ्तार 10 किलोमीटर प्रति घंटा की चाल से चलाई जाती है जिससे कोई अप्रिय घटना ना हो सके। मेले का आयोजन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक चलता है। प्रशासन द्वारा पूरी भीड़ को मैदान से हटाकर कस्बे तक पहुंचा दिया जाता है। मैदान खाली होने के बाद ही प्रशासन का जत्था वहां से रवाना होता है । इस दौरान ट्रैक पर लगातार 8 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी भी लगाई जाती है जो रेलवे ट्रैक से श्रद्धालुओं को दूर रखते हैं।

👉एक ही पुल से पैदल, छोटे व बड़े वाहनों सहित ट्रेन की होती थी आवाजाही

32 साल पहले उसका बाजार में एक ऐसा पुल था जिस पर पैदल दोपहिया चार पहिया बड़े वाहन व ट्रेन की आवाजाही होती थी। ट्रेन आने पर प्रशासन व रेलवे की मदद से लोगों को रोक दिया जाता था। इसके बाद पहले दो पहिया, फिर चार पहिया वाहनों को निकाला जाता था। सबसे अंत में बड़े वाहनों को पुल पार कराया जाता था। व्यवस्था ऐसी थी कि अभी तक कोई चूक सामने नहीं आयी। यह पुल वर्तमान में भी है जिस पर दो पहिया और पैदल लोगों की आवाजाही होती है। रेलवे के लिए अलग पुल का निर्माण किया जा चुका है। इसके अलावा बड़े वाहनों के लिए अन्य नए पुल का निर्माण किया जा चुका है।

👉इन्होंने कहा और मीडिया के माध्यम से लोगों को दी जानकारी

👁️‍🗨️👁️‍🗨️रामलीला का आयोजन लगभग 300 वर्षों से हो रहा है। रामलीला का आयोजन विगत 6 पीढ़ियों से पीढ़ी दर पीढ़ी किया जा रहा है इसका निर्माण हर वर्ष होता है जिसमें प्रशासन स्थानीय जनप्रतिनिधि व समाजसेवी द्वारा सहयोग मिलता है👁️‍🗨️👁️‍🗨️

👉लाल बहादुर दास, महंत, पयोहारी आश्रम

रेलवे ट्रैक से सटे हुए ही लगभग 11 एकड़ की भूमि में रामलीला मैदान है। जहां हर वर्ष रामलीला का आयोजन होता है। स्थानीय व्यपारी, गणमान्य, जनप्रतिनिधियों, प्रशासन व रेलवे के सहयोग से हर वर्ष सुचारू रूप से रामलीला व भरत मिलाप संपन्न होता है।

संवाददाता गोरखपुर…

parveen journalist

Recent Posts

गीता की दृष्टि में सात्त्विक विवेक: कर्तव्य, धर्म और मोक्ष का मार्ग

दिलीप कुमार अग्रवाल विवेक को बुद्धि, ज्ञान, प्रज्ञा, सूझबूझ अथवा समझदारी भी कहा जाता है।…

2 hours ago

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाएं, हर नागरिक एक पौधे का ले संकल्प : हरित सारथी नवनीत मिश्र

लखनऊ/संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश वन एवं वन्यजीव विभाग के हरित सारथी…

2 hours ago

डीडीयू के विभिन्न पाठ्यक्रमों के चौथे सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम घोषित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने सत्र 2025-26 के विभिन्न पाठ्यक्रमों के…

2 hours ago

कार्य परिषद की बैठक में तीन प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस और नई नियुक्तियों को मंजूरी, 25 शिक्षक बने वरिष्ठ आचार्य

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता…

3 hours ago

डीएम ने पेयजल योजनाओं की समीक्षा की, जुलाई तक 44 योजनाएं पूरी करने का लक्ष्य

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में…

3 hours ago

आम तोड़ने के दौरान पेड़ से गिरा युवक, उपचार से पहले ही मौत

बलईखोर गांव में हादसे के बाद मातम, पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा महराजगंज…

3 hours ago