गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। ‘कविताएं और साहित्य न होती तो दुनिया में हुए युद्धों में और भी अधिक विनाश होता यह कविताएं ही हैं। जो मनुष्य को ईश्वर के होने का बोध कराती हैं।’
उक्त वक्तव्य हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर अनंत मिश्र के हैं। प्रो. मिश्र दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत सप्ताह के अंतर्गत हिंदी विभाग द्वारा आयोजित ‘काव्य पाठ एवं वक्तव्य’ में मुख्य अतिथि के रूप व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि विभाग से ज्यादा प्रिय घर होता है। लेकिन हम लोग बार-बार यहां लौटना चाहते हैं, क्योंकि यह निर्माण स्थली है, मनुष्य का व्यक्तित्व उसकी धारणा से बनता है। साहित्यकारों के बनाए हुए मूल्य नहीं होते तो कोई भी देशभक्त पैदा नहीं होता। कला, साहित्य और संस्कृति नहीं होती तो दुनिया का चलना संभव नहीं होता।
कार्यक्रम का प्रारंभ बीजेएमसी के छात्रों के कुलगीत गायन से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर दीपक प्रकाश त्यागी ने कहा कि विश्विद्यालय का हिंदी विभाग एक रचनात्मक विभाग है जो साहित्य के क्षेत्र में समय समय पर योगदान देता रहता है। यह बड़े सौभाग्य की बात है कि विभाग को प्रोफ़ेसर अनंत मिश्र का सानिध्य मिला है। उनके कविता संग्रहों से साहित्य के विद्यार्थी बहुत कुछ सीख सकते हैं।
प्रो. अनंत मिश्र ने अपने वक्तव्य के बाद मेरा पता, जीवन का काम, दर्जी, बूढ़े, नाला, हमारे समय, सावधान बच्चों और कृपया धीरे चलें नमक कविताएं पढ़ीं। साथ ही स्त्री विमर्श पर ‘मर गई स्त्री’ नामक कविता का भी पाठ किया।
कार्क्रम का संचालन कर रहे सहायक आचार्य डॉ अभिषेक शुक्ल ने कहा कि हम अपने किरदार के साथ अपने वर्तमान में भी जी रहे हैं, ऐसे ही एक कवि सिर्फ रचना के वक्त कवि नहीं रहता बल्कि हर समय जीवंत और जागृत रहता है।
सहायक आचार्य डॉ. ऋतु सागर ने सबका आभार व्यक्त करते कहा कि हिंदी विभाग आगे भी ऐसे ही रचनात्मक कार्यक्रम करता रहेगा।
इस अवसर पर प्रो. कमलेश गुप्त, प्रो. राजेश मल्ल, प्रो. प्रत्यूष दुबे, डॉ. अखिल मिश्र, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. अपर्णा, डॉ. प्रियंका नायक, आयुष सेंगर, अभय शुक्ला आदि शिक्षक और छात्र मौजूद रहे।
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