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महान् अक्टूबर क्रान्ति दिवस: सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की विश्व-स्तरीय ऐतिहासिक घटना

महान् अक्टूबर क्रान्ति दिवस 7 नवम्बर को उन ऐतिहासिक परिवर्तनों की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने बीसवीं शताब्दी की राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था की दिशा को गहराई से प्रभावित किया। वर्ष 1917 में रूस में हुए इस परिवर्तन ने न केवल ज़ारशाही शासन का अंत किया, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था की स्थापना की, जिसने समानता, श्रम और सामाजिक न्याय के नए सिद्धांतों को विश्व मंच पर स्थापित किया। यह क्रांति उस युग के सामाजिक संघर्षों, युद्धकालीन कठिनाइयों और व्यापक आर्थिक विषमता के विरुद्ध जनता की संगठित आकांक्षा का परिणाम थी।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रूस की स्थिति अत्यंत विषम हो गई थी। आम जनता महँगाई, भुखमरी और युद्ध के दुष्प्रभावों से जूझ रही थी। सैनिक मनोबल टूट चुका था और उद्योग-धंधे ठप हो गए थे। ऐसे समय में लेनिन और बोल्शेविक पार्टी ने जनता के सामने एक वैकल्पिक व्यवस्था की कल्पना रखी— ऐसी व्यवस्था जिसमें सत्ता का केंद्र शासक कुल नहीं, बल्कि श्रमिक वर्ग और किसान समाज हो। 7 नवम्बर 1917 को पेट्रोग्राद (अब सेंट पीटर्सबर्ग) में विंटर पैलेस पर नियंत्रण के साथ क्रांति ने निर्णायक रूप ले लिया और पूरे रूस में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई।

महान् अक्टूबर क्रांति का महत्व केवल राजनीतिक परिवर्तन तक सीमित नहीं था। इसने सामाजिक संरचना को भी प्रभावित किया। भूमि का पुनर्वितरण, उद्योगों का राज्य नियंत्रण, श्रमिकों को अधिकार, महिलाओं को मतदान व राजनीतिक सहभागिता का अवसर— ये सभी कदम क्रांति की वैचारिक दिशा को स्पष्ट करते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और श्रम नीतियों को नए रूप में परिभाषित किया गया, जिससे आम लोगों के जीवन में सुरक्षा और अवसर की भावना विकसित हुई। इस क्रांति ने यह संदेश दिया कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति तभी संभव है, जब समाज के सभी वर्ग विकास की प्रक्रिया में समान भागीदारी प्राप्त करें।

विश्व राजनीति पर इस क्रांति का प्रभाव अत्यंत व्यापक रहा। पूँजीवादी और समाजवादी विचारधाराओं के बीच वैचारिक संघर्ष तीव्र हुआ और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था नए संतुलन की ओर बढ़ी। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में औपनिवेशिक शासन से मुक्ति के आंदोलनों को भी इससे प्रेरणा मिली। कई देशों में सामाजिक न्याय, श्रमिक अधिकार और समान वितरण के सिद्धांतों पर आधारित नीतियों की रूपरेखा तैयार होने लगी। इस प्रकार महान अक्टूबर क्रांति वैश्विक विचारधारा की दिशा बदलने वाली घटना सिद्ध हुई।

आज महान् अक्टूबर क्रान्ति दिवस हमें यह अवसर देता है कि हम इतिहास के उस अध्याय से सीखें जिसने सामाजिक विषमता, शोषण और अन्याय के विरुद्ध सामूहिक संघर्ष की शक्ति को सिद्ध किया। यह दिवस यह भी स्मरण कराता है कि किसी भी व्यवस्था का स्थायित्व तभी संभव है, जब वह आम जनता की आवश्यकताओं, अधिकारों और अपेक्षाओं के अनुरूप हो। इतिहास चाहे जिस दिशा में आगे बढ़ गया हो, अक्टूबर क्रांति की मूल भावना— सामाजिक न्याय, समानता और जनभागीदारी— आज भी सामाजिक विमर्श और लोकतांत्रिक संवेदनशीलता के प्रमुख आधार बने हुए हैं।

महान अक्टूबर क्रांति दिवस इस ऐतिहासिक विरासत के प्रति सम्मान का अवसर है और उस विचार की पुनर्पुष्टि भी कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब उसकी नींव समान अवसर, मानवीय मूल्यों और सार्वजनिक कल्याण के सिद्धांतों पर आधारित हो।

rkpNavneet Mishra

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