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विश्वविद्यालय में “चंदन वाटिका” का भव्य शुभारंभ

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने लगाया पहला पौधा, पर्यावरणीय चेतना को मिला नया स्वरूप

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में एक प्रेरणादायी एवं पर्यावरण-संवेदनशील पहल के अंतर्गत “चंदन वाटिका” की स्थापना का भव्य शुभारंभ किया गया। यह वाटिका विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान शोध भवन के सामने विकसित की गई है। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर को हरित, सुगंधित एवं जैविक रूप से समृद्ध बनाना है, साथ ही विद्यार्थियों और शोधार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता एवं संवेदनशीलता उत्पन्न करना भी है।

इस नवाचार की प्रेरणा उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की पर्यावरणीय सोच से मिली है, जिनके निर्देशन में राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में औषधीय एवं जैविक महत्त्व के वृक्षों का रोपण किया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस भावना को आत्मसात कर “चंदन वाटिका” की परिकल्पना को साकार किया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने कर-कमलों से चंदन का पौधा रोपित कर इस पर्यावरणीय पहल का औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा—
“चंदन वृक्ष भारतीय संस्कृति, सुगंध और औषधीय गुणों का अद्वितीय प्रतीक है। इसका रोपण न केवल पर्यावरणीय संरक्षण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्राकृतिक धरोहर सौंपने की दिशा में एक सार्थक कदम भी है। विश्वविद्यालय की ‘ग्रीन कैंपस नीति’ इस प्रकार की पहलों से और सशक्त होगी।”

चंदन वाटिका में वैज्ञानिक, औषधीय और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से चयनित चंदन पौधों का रोपण किया जा रहा है। भविष्य में यह स्थान छात्रों व शोधकर्ताओं के लिए एक शोध एवं अध्ययन केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा।

कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. अनुभूति दुबे द्वारा किया गया। उन्होंने इस परियोजना को “एक दीर्घकालिक जैविक निवेश” बताते हुए कहा कि चंदन वाटिका विद्यार्थियों को प्रकृति से गहरे स्तर पर जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी।
कार्यक्रम के समापन पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों से पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने, वृक्षारोपण करने एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को नैतिक उत्तरदायित्व के रूप में निभाने का आह्वान किया। साथ ही यह भी कहा गया कि “चंदन वाटिका” का रक्षण-संवर्धन एक सामूहिक जिम्मेदारी होगी, जिसमें विश्वविद्यालय समुदाय की सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से प्रो. जितेन्द्र मिश्र, प्रो. विनय कुमार सिंह, प्रो. उमेश नाथ त्रिपाठी, प्रो. आर. ए. सिंह, प्रो. रविकान्त उपाध्याय, प्रो. वीना बत्रा कुशवाहा, प्रो. उषा सिंह, प्रो. सुषमा पाण्डेय, प्रो. दिव्या रानी सिंह, डॉ. कुशलनाथ मिश्र, प्रो. केशव सिंह, प्रो. विनोद कुमार सिंह, प्रो. निखिल कान्त शुक्ला, डॉ. सत्यपाल सिंह, डॉ. अमित उपाध्याय, डॉ. सूर्यकान्त त्रिपाठी सहित विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ सदस्य, विभागाध्यक्षगण, निदेशकगण एवं संकायजन उपस्थित रहे और व्यक्तिगत रूप से पौधारोपण कर पर्यावरण-संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रकट कियाl

rkpnews@somnath

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