गोरखनाथ ने भारतीय ज्ञान परम्परा को आचरण मूलक एवं त्याग मूलक बनाया: प्रो. चितरंजन मिश्र

बुद्ध के बाद एवं भक्ति आंदोलन के पूर्व गोरखनाथ सबसे तेजस्वी अध्यात्म नेता एवं पुरुष: प्रो. चितरंजन मिश्र

भारतीय ज्ञान परम्परा में नाथ संप्रदाय पर पुस्तक समीक्षा एवं विशिष्ट व्याख्यान आयोजित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर की कुलपति प्रो. पूनम टंडन के संरक्षण में दीक्षांत समारोह सप्ताह के अंतर्गत महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ में भारतीय ज्ञान परम्परा में नाथ संप्रदाय विषय पर पुस्तक समीक्षा के आयोजन के अंतिम चरण में मंगलवार को विशिष्ट व्याख्यान के पश्चात पुरस्कार वितरित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. चितरंजन मिश्र, पूर्व प्रति कुलपति, महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा व अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टंडन द्वारा की गयी।
मुख्य अतिथि प्रो. चितरंजन मिश्र ने भारतीय ज्ञान परम्परा के वृहद समृद्ध स्वरूप पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा बेहद समृद्ध है। इसमें वैदिक परंपरा है, पौराणिक परम्परा है, इसमें वह भी परम्परा है। जो इन परंपराओं को खारिज करता है। यह अपनी विविधता को सँजोने वाली अद्भुत परंपरा है। बुद्ध के पहले ऐसा कोई नहीं था। जिसे ज्ञानी कहा जाए। बुद्ध का ज्ञान पहला ज्ञान है जो बाहर गया।
उन्होंने मक्खलि गोसाल के आजीवक दर्शन एवं गोरखनाथ के दर्शन की तुलना करते हुए कहा कि गोरखनाथ का दर्शन मक्खलि गोसाल के दर्शन से मिलता जुलता है। उन्होंने कहा कि बुद्ध के बाद एवं भक्ति आंदोलन के पूर्व गोरखनाथ सबसे तेजस्वी अध्यात्मिक नेता एवं महापुरुष हुए है। गोरख ने अतार्किक औपनिषदिक ज्ञान को नाथ परम्परा में अस्वीकार किया। गोरखनाथ ने भारतीय ज्ञान परम्परा को आचरण मूलक एवं त्याग मूलक बनाया।
इसके पूर्व कार्यक्रम का प्रारंभ मुख्य अतिथि प्रो. चितरंजन मिश्र एवं कुलपति प्रो. पूनम टंडन द्वारा दीप प्रज्जवलन और शोधपीठ के रिसर्च एसोसिएट डॉ. सुनील कुमार के मंगलाचरण से हुआ। शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशल नाथ मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया तथा विषय प्रवर्तन किया
विगत 23 अगस्त को आयोजित पुस्तक समीक्षा लेखन प्रतियोगिता, जिसमें गोरखपुर विश्वविद्यालय एवं इससे सम्बद्ध महाविद्यालयों के अनेक प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने कुल 15 पुस्तकों की समीक्षा किया। विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार दिया गया। जिसमें प्रथम स्थान दिव्य ज्योति मौर्य, द्वितीय स्थान निधि यादव, तृतीय स्थान नेहा तिवारी एवं सांत्वना पुरस्कार जावेरिया अहमदी को दिया गया।
वहीं 7 अगस्त को आयोजित उत्तर भारत के संत विषयक स्केचिंग चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं कनिष्ठ वर्ग में आर्यन भारती ने प्रथम स्थान, सदानन्द साहनी ने द्वितीय स्थान, कृष्ण वर्मा ने तृतीय स्थान और वरिष्ठ वर्ग में अनामिका कुमारी ने प्रथम स्थान, उमा भारती ने द्वितीय स्थान, हर्षित गुप्ता ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
आभार ज्ञापन शोधपीठ के सहायक ग्रंथालयी डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी व संचालन शोधपीठ के सहायक निदेशक डॉ. सोनल सिंह ने किया।
इस आयोजन में गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण एवं शोध-छात्र, विद्यार्थी समेत, दीक्षांत समारोह समिति की संयोजक प्रो. नंदिता सिंह, अधिष्ठाता, छात्र कल्याण प्रो. अनुभूति दुबे, प्रो. विमलेश मिश्र, प्रो. शरद मिश्र, प्रो. राजेश कुमार सिंह, प्रो. गौर हरि बोहरा, प्रो. करुणाकर राम त्रिपाठी, डॉ. मीतू सिंह, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. गौरी शंकर चौहान, वरिष्ठ शोध अध्येता हर्षवर्धन सिंह, चिन्मयानंद मल्ल आदि उपस्थित रहे।

rkpnews@somnath

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