संतों, विद्वानों और महापुरुषों
की कृपा दृष्टि जब मिलती है,
जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं,
ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।
ये दुनिया है और इस दुनिया में
सब तरह के इंसान मिलते ही हैं,
कोई महाभारत का शिखंडी है,
कोई श्रीकृष्ण है तो कोई पार्थ है।
दुर्योधन था तो युधिष्ठिर भी थे,
कर्ण था तो भीष्म पितामह भी थे,
एकलव्य था तो गुरू द्रोण भी थे,
महाभारत रचयिता व्यास जी थे।
द्वापर के पहले त्रेता युग में भी तो
श्री राम जी थे, तो रावण भी था,
सीता माता थीं, सुपर्णखा भी थी,
कौशल्या जी थीं, कैकेई भी थी।
आज इस युग में नाम कमाने की
चारों ओर होड़ की दौड़ सी लगी है,
महाकुंभ हो या छोटा सा मेला हो,
आज सबको अपनी अपनी पड़ी है।
शायद आज संतों की तो कम,
नेताओं की महिमा ज़्यादा ही है,
आदित्य ईश्वर की महिमा कम
हम भक्तों की महिमा ज़्यादा है।
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया शहर के मालवीय रोड ओवरब्रिज पर सोमवार को उस समय…
तेहरान/वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर…
शामली (राष्ट्र की परम्परा)। हरियाणवी गायक अंकित बालियान हत्याकांड में शामली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया की पूर्व जिलाधिकारी और 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या…
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। बरहज विधानसभा क्षेत्र के विकास, बदहाल मोहन सेतु, सोनूघाट से बरहज…
बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में वाल्टरगंज थाना प्रभारी सूर्यप्रकाश सिंह…