संतों, विद्वानों और महापुरुषों
की कृपा दृष्टि जब मिलती है,
जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं,
ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।

ये दुनिया है और इस दुनिया में
सब तरह के इंसान मिलते ही हैं,
कोई महाभारत का शिखंडी है,
कोई श्रीकृष्ण है तो कोई पार्थ है।

दुर्योधन था तो युधिष्ठिर भी थे,
कर्ण था तो भीष्म पितामह भी थे,
एकलव्य था तो गुरू द्रोण भी थे,
महाभारत रचयिता व्यास जी थे।

द्वापर के पहले त्रेता युग में भी तो
श्री राम जी थे, तो रावण भी था,
सीता माता थीं, सुपर्णखा भी थी,
कौशल्या जी थीं, कैकेई भी थी।

आज इस युग में नाम कमाने की
चारों ओर होड़ की दौड़ सी लगी है,
महाकुंभ हो या छोटा सा मेला हो,
आज सबको अपनी अपनी पड़ी है।

शायद आज संतों की तो कम,
नेताओं की महिमा ज़्यादा ही है,
आदित्य ईश्वर की महिमा कम
हम भक्तों की महिमा ज़्यादा है।

  • डॉ. कर्नल
    आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

rkpNavneet Mishra

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