नाग देवता और शिव मंदिरों की महिमा : दर्शन से दूर होते हैं दुख और दोष

(राष्ट्र की परम्परा के लिए पंडित जय प्रकाश पाण्डेय की रिपोर्ट)

भारतीय संस्कृति में भगवान शिव और नाग देवता का अटूट संबंध माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के गले में विराजमान नाग वासुकी केवल आभूषण नहीं बल्कि शक्ति, संरक्षण और कल्याण के प्रतीक हैं। यही कारण है कि सावन के पवित्र महीने में भक्त न केवल शिवालयों में पूजा-अर्चना करते हैं बल्कि नाग देवता को दूध चढ़ाकर विशेष अनुष्ठान भी करते हैं।
माना जाता है कि जो भी भक्त भगवान शिव के साथ नाग देवता की आराधना करता है, उसके जीवन के दुख-दर्द दूर होते हैं और कालसर्प सहित अन्य दोषों से मुक्ति मिलती है। भारत में ऐसे कई प्राचीन और शक्तिशाली मंदिर हैं जो नाग देवता को समर्पित हैं और जिनके दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आइए जानते हैं इन प्रमुख मंदिरों के बारे में—
मन्नारसाला श्री नागराजा मंदिर, केरल
केरल के हरिपाड में स्थित यह मंदिर सांपों के राजा को समर्पित है। घने जंगलों के बीच बसा यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा और आस्था के लिए प्रसिद्ध है। यहां 30 हजार से अधिक नाग मूर्तियां स्थापित हैं। विशेष बात यह है कि इस मंदिर की पूजा-अर्चना महिला पुजारी द्वारा की जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि यहां नाग देवता की आराधना करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और परिवार की पीढ़ियां सुरक्षित रहती हैं। सावन के महीने में मंदिर का वातावरण हरियाली और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो जाता है।
कुक्के सुब्रमण्य मंदिर, कर्नाटक
दक्षिण कन्नड़ जिले के वेस्टर्न घाट की पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर भगवान सुब्रमण्य को समर्पित है, जिन्हें नागों का स्वामी कहा जाता है। यहां विशेष रूप से सर्प संस्कार और अश्लेषा बली जैसे अनुष्ठान होते हैं, जिनसे पूर्वजों के श्राप और दोषों से मुक्ति मिलती है।
कुमारधारा नदी और घने जंगलों से घिरा यह स्थल भक्तों को न केवल आध्यात्मिक अनुभव देता है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा नजारा भी प्रस्तुत करता है।
नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन (मध्यप्रदेश)
महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर पूरे साल बंद रहता है और केवल नाग पंचमी के दिन ही खुलता है।
यहां भगवान शिव, मां पार्वती और उन पर फन फैलाकर बैठे नाग देवता की मूर्ति विराजमान है। सावन में इस मंदिर के दर्शन करना भक्तों के लिए अद्वितीय सौभाग्य माना जाता है।
नाग वासुकी मंदिर, प्रयागराज (उत्तरप्रदेश)
गंगा के तट पर दारागंज क्षेत्र में स्थित नाग वासुकी मंदिर नागों के राजा वासुकी को समर्पित है। कालसर्प दोष से पीड़ित लोग विशेष रूप से यहां आकर पूजा करते हैं।
मंदिर का मुख त्रिवेणी संगम की ओर है, जो इसकी महत्ता को और भी पवित्र बना देता है। सावन और नाग पंचमी पर यहां भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुंचते हैं।
नाग मंदिर, पटनीटॉप (जम्मू-कश्मीर)
हरी-भरी पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित यह नाग मंदिर लगभग 600 साल पुराना है। यह मंदिर अपनी शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है।
सावन और नाग पंचमी के अवसर पर यहां विशेष पूजा और मंत्रोच्चार होते हैं, जिनसे वातावरण अत्यंत पावन और दिव्य हो जाता है।

नाग देवता की पूजा भगवान शिव की आराधना का अभिन्न हिस्सा है। भारत के ये प्राचीन मंदिर केवल आस्था के प्रतीक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी हैं। यहां दर्शन करने से न केवल जीवन के कष्ट और दोष दूर होते हैं बल्कि श्रद्धालुओं को अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा भी प्राप्त होती है।

Editor CP pandey

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