गर्मागर्मी के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में गहलोत – थरूर आमने-सामने

आमने सामने योद्धा

कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नजदीक आ गया है और इसके साथ ही पूरी तस्वीर साफ हो गयी हैं। लंबे समय से राहुल गांधी की दावेदारी को लेकर कंफ्यूजन बना हुआ था लेकिन अब खबरें कंफर्म है कि राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे। राहुल गांधी के खेमे से राज्स्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लडेंगे। कांग्रेस में दो दशक बाद पार्टी अध्यक्ष पद के लिए कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर को संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस के खत्म होते वर्चस्व को एक बार फिर से खड़ा करने के लिए कांग्रेस ने एक रणनीति के तहत भारत जोड़ी यात्रा निकाली है जिसमें पूरे भारत का भ्रमण कि या जा रहा है। कांग्रेस के बड़े दिग्गज नेताओं ने भी पार्टी छोड़ दी हैं। ऐसे में कांग्रेस राजनीतिक ऑक्सीजन के लिए संघर्ष कर रही है। भाजपा के द्वारा कांग्रेस राजनीतिक कटाक्ष का शिकार रही है और राहुल गांधी का मजाक उड़ाया गया। भाजपा के निर्मम हमले के मूल में वंशवाद की राजनीति के आरोप हैं और इस बार कांग्रेस अपनी इस छवि को तोड़ना चाहती हैं।राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि गांधी परिवार से कोई भी अगला पार्टी अध्यक्ष नहीं बनना चाहिए। राहुल का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस अध्यक्ष पद की लड़ाई तेज हो गई है।गहलोत ने शुक्रवार को केरल में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “मैंने उनसे (राहुल गांधी) कई बार अनुरोध किया है कि कांग्रेस अध्यक्ष बनने के सभी के प्रस्ताव को स्वीकार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांधी परिवार से कोई भी अगला प्रमुख नहीं बनना चाहिए। “गहलोत ने कहा कि वह जल्द ही चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए विपक्ष को मजबूत होने की जरूरत है।अशोक गहलोत और पार्टी सांसद शशि थरूर को आगामी चुनाव के संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। हालाँकि, देश भर में कांग्रेस समितियाँ बैठकें कर रही हैं जिसमें एक प्रस्ताव पारित किया जा रहा है जिसमें कहा गया है कि “हम आने वाले कांग्रेस अध्यक्ष को पीसीसी और एआईसीसी सदस्यों को नियुक्त करने के लिए अधिकृत करते हैं।”पार्टी के समर्थन के बावजूद, राहुल गांधी खुद पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए दौड़ने के अपने फैसले पर चुप्पी साधे हुए हैं। इससे पहले, उन्होंने अपने फैसले के बारे में एक गुप्त टिप्पणी की और कहा, “मैं (कांग्रेस का) अध्यक्ष बनूंगा या नहीं, यह तब स्पष्ट हो जाएगा जब राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होगा।”कन्याकुमारी में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर वह नामांकन दाखिल नहीं करते हैं, तो उनसे पूछा जाना चाहिए कि वह नेतृत्व लेने के खिलाफ क्यों थे और वह जवाब देंगे। कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव 17 अक्टूबर को होना है। मतगणना 19 अक्टूबर को होगी।आपको बता दे कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 22 साल बाद चुनावी मुकाबले की प्रबल संभावना के बीच बृहस्पतिवार को अधिसूचना जारी कर दी गई और इसी के साथ चुनावी प्रक्रिया आरंभ हो गई। इस चुनावी हलचल के बीच, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के प्रमुख का पद ‘वैचारिक’ है और जो भी इस जिम्मेदारी को संभालता है, उसे यह याद रखना चाहिए कि वह भारत के एक नजरिये का प्रतिनिधित्व करेगा। राहुल गांधी पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि वह इस चुनाव से दूर उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि ‘उदयपुर चिंतन शिविर’ में तय हुई ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की व्यवस्था पर पूरी तरह अमल किया जाएगा। इससे एक दिन पहले ही, कांग्रेस अध्यक्ष पद के एक संभावित उम्मीदवार के रूप में देखे जा रहे अशोक गहलोत ने यह संकेत दिया था कि वह अध्यक्ष पद और राजस्थान के मुख्यमंत्री का पद दोनों संभाल सकते हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की इस ताजा टिप्पणी से इसकी संभावना बढ़ गई है कि कांग्रेस का अध्यक्ष चुने जाने पर गहलोत को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है, हालांकि इसको लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई कि उनके हटने पर सचिन पायलट मुख्यमंत्री होंगे या फिर गहलोत की पसंद का ही कोई नेता इस जिम्मेदारी को संभालेगा। कांग्रेस के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण की ओर से अधिसूचना जारी होने के साथ ही देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल के सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाले व्यक्ति को चुनने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आरंभ हो गई। पार्टी के वरिष्ठ नेता मधुसूदन मिस्त्री की अध्यक्षता वाले केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण की ओर से यह अधिसूचना जारी की गई।

Editor CP pandey

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