रांची (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) झारखंड की राजनीति में रविवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता चंपई सोरेन को पुलिस प्रशासन ने नजरबंद कर दिया। यह कदम उस समय उठाया गया जब राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में एक बहु-कोर सरकारी स्वास्थ्य संस्थान की स्थापना के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आदिवासी संगठनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने चंपई सोरेन के आवास पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और उनके बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के एहतियाती उपाय के तौर पर की गई है।
प्रदर्शन कर रहे आदिवासी संगठनों का आरोप है कि सरकार बहु-कोर प्रोजेक्ट के नाम पर आदिवासी जमीन छीन रही है। उनका कहना है कि इस भूमि पर वर्षों से स्थानीय समुदाय की आजीविका निर्भर रही है और इसे छीनना संविधान द्वारा प्रदत्त उनके अधिकारों का उल्लंघन है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जबरन भूमि अधिग्रहण जारी रहा तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
वहीं भाजपा नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार आदिवासी हितों की अनदेखी कर रही है और उनकी आवाज दबाने के लिए विपक्षी नेताओं को नजरबंद किया जा रहा है। इस बीच, प्रशासन ने साफ किया है कि चंपई सोरेन की गतिविधियों पर रोक सिर्फ एहतियातन लगाई गई है ताकि तनावपूर्ण माहौल में किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।
फिलहाल, नजरबंदी की अवधि और आगे की कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, इस घटनाक्रम ने झारखंड की राजनीति में हलचल मचा दी है और आने वाले दिनों में इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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