14 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम दौरे पर थे। इसी दौरान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर गुवाहाटी से इंफाल की एक फ्लाइट टिकट साझा की, जिसमें यात्री के नाम में प्रधानमंत्री का नाम दर्ज था। कांग्रेस का कहना था कि जब पीएम असम में हैं तो उन्हें हिंसा प्रभावित मणिपुर भी जाना चाहिए। टिकट की तस्वीर वायरल होते ही यह बहस छिड़ गई कि क्या कोई भी व्यक्ति प्रधानमंत्री के नाम पर टिकट बुक कर सकता है?
टिकट बुकिंग बनाम यात्रा: फर्क समझिए
एयरलाइन टिकट बुक करना और विमान में बैठकर यात्रा करना दो अलग प्रक्रियाएं हैं।
• ऑनलाइन बुकिंग के समय आमतौर पर नाम, उम्र और बुनियादी पहचान संबंधी जानकारी दर्ज की जाती है।
• सिस्टम यह स्वतः जांच नहीं करता कि दर्ज नाम किसी वीआईपी या सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति का है या नहीं।
• तकनीकी रूप से कोई भी व्यक्ति किसी भी नाम से टिकट बुक करने की कोशिश कर सकता है।
लेकिन यह सिर्फ बुकिंग स्तर तक सीमित रहता है।
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एयरपोर्ट पर असली जांच
भारत में घरेलू उड़ान के लिए:
• चेक-इन के समय वैध फोटो पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य है।
• टिकट पर दर्ज नाम और आईडी पर लिखा नाम पूरी तरह मेल खाना चाहिए।
• नाम में अंतर होने पर बोर्डिंग पास जारी नहीं किया जाता।
प्रधानमंत्री जैसे संरक्षित व्यक्ति सामान्य कमर्शियल फ्लाइट से यात्रा नहीं करते। उनकी यात्रा विशेष विमान और कड़ी सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत होती है। ऐसे में यदि किसी ने उनके नाम से टिकट बुक भी कर लिया हो, तो वह केवल कागजी या डिजिटल रिकॉर्ड तक सीमित रहेगा।
क्या यह गैरकानूनी है?
सिर्फ किसी नाम से टिकट बुक कर देना अपने आप में अपराध नहीं है।
लेकिन यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेज, धोखाधड़ी या पहचान के दुरुपयोग के जरिए यात्रा की कोशिश करता है, तो यह कानून के दायरे में आ सकता है।
इस मामले में साझा की गई टिकट एक राजनीतिक संदेश के तौर पर थी। वास्तविक यात्रा होना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।
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