547 वर्ष का इतिहास समेटे है कोपागंज प्राचीन शिव मन्दिर

यहाँ झूठी कसमे खाने से परहेज करते है लोग

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा ) जनपद के कोपागंज क़स्बा स्थित ऐतिहासिक प्राचीन गौरीशंकर मंदिर 547 वर्ष का इतिहास अपने आप मे समेटा हुआ है । उक्त मन्दिर का निर्माण पिथौरागढ़ के राजा ने सन 1472 में कराया था । मन्दिर के बारे में लोगो की किवदंतिया है कि उक्त मन्दिर आज भी लोग झूठी कसमे खाने से परहेज करते है । लोगो का यह भी मानना है ही की सच्चे मन से की गयी प्रार्थना हमेशा फलदायी होती है ।

कोपागंज स्थित प्राचीन गौरीशंकर मंदिर वाराणसी गोरखपुर राष्ट्रीय राज मार्ग 29 पर स्थित है । उक्त मन्दिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि यहां पर मंदिर के गर्भ गृह में स्थित शिवलिंग की स्थापना किसी ने नहीं कराई है अपितु यह स्वयं प्रकट हुआ है। कहा जाता है कि लगभग 547 वर्ष पूर्व पिथौरागढ़ नरेश कुष्ठ रोग से पीड़ित थे और इधर से अपनी सेना के साथ नेपाल के लिए गुजर रहे थे। कुछ देर विश्राम करने के लिए इसी गौरीशंकर मंदिर के प्रांगण में रुके। उस समय यह मंदिर परिसर जंगलों और झाड़ से ढका हुआ था।
उसी समय राजा को स्वप्न में मंदिर के अंदर शिवलिंग ढके होने की जानकारी हुई। राजा से स्थानीय लोगों से मंदिर की साफ सफाई कराने के लिए सहयोग मांगा। लेकिन कोई आगे नहीं आया। राजा ने अपने राज्य पिथौरागढ़ से धन मगाकर इस मन्दिर की साफ सफाई कराया और सफाई के दौरान गर्भगृह में नीचे दबे शिवलिंग का पता चला। राजा ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। इस मंदिर की विशेषता यह है कि इसका गर्भ गृह हर मौसम में वातानुकूलित रहता है। सावन माह भर लोग बनारस और गाजीपुर मारकंडेय धाम से गंगाजल लाकर भगवान भोले का जलाभिषेक करतेे हैं।
उक्त मन्दिर पर महाशिवरात्रि के पर्व को लेकर कोपागंज शिव परिवार कावरिया सघ के अध्यक्ष राकेश यादव गुड्डू व दिनेश सोनकर कार्तिक मोदनवाल आदि के नेतृत्व मे पूरे सावन भर मन्दिर की साफ सफाई व साज सज्जा कराया जाता है ।ताकि मन्दिर पर जल व पूजा पाठ करने वाले महिला पुरुष भक्तो को दिक्कते न हो ।

इनसेट

कोपागंज स्थित अतिप्राचीन शिव मंदिर की देख रेख मन्दिर के पुजारी चन्द्रमौली गिरी व अन्य परिजनों द्वारा किया जाता है । उक्त मन्दिर पर कोपागंज कस्वा ही नही अपितु आस पास के कई दर्जन गांवों के पुरुष महिलाओ के अलावा जनपद मुख्यालय तक के लोग सावन मास के अलावा प्रत्येक सोमवार को पूजा पाठ करने आते है । वैसे तो प्राचीन शिव मंदिर काफी पुराना होने से जर्जर की स्थिति में पहुँच गया है । लेकिन कस्वे के कुछ सम्भान्त नागरिको की पहल व देख रेख के चलते समय समय पर मन्दिर का जीर्णोद्धार कराया जाता है । पूरे सावन भर प्रत्येक सोमवार को मन्दिर परिसर में शिव परिवार कल्याण समिति द्वारा भव्य भंडारे का आयोजन होने के साथ ही मेले लगता है । जिसका सभी आनन्द उठाते है ।

rkpnews@desk

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