फसलों को फफूंदीजनित रोगों व पाला से किसान कर सकते है बचाव-कुमारी इरम

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। जिला कृषि रक्षा अधिकारी कुमारी इरम ने बताया है कि इस समय ठंड, फोहरे तथा नमी के कारण आलू, टमाटर, राई, सरसों आदि फसलों पर फफूंदीजनित रोग(झुलसा) तथा पाला पड़ने की संभावना है। इस मौसम में पौधों की बढ़वार अधिक होती है तथा पतियाँ मुलायम, छोटी होती है। इस कारण पर्याप्त धूप न मिलने तथा कोहरा पड़ने के कारण रोग लग सकते हैं। आलू में पिछेती सुलसा रोग के कारण पतियों की निचली सतह पर सफेद गोले बन जाते हैं जो बाद में भूरे- काले हो जाते हैं, नमी पाने पर यह रोग तेज़ी से फैलता है, पूरा पौधा प्रभावित हो जाता है तथा आलू के कन्दो का आकार छोटा रह जाता है। निदान हेतु फेनोमिडान$मैकोजेब 03 कि0ग्रा0 प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लिटर पानी में घोलकर स्प्रे करें। 10 दिन बाद आवश्यकतानुसार पुनः रसायन बदलकर स्प्रे करें।
आलू में अगेती झुलसा रोग लगने के कारण पौधों की निचली पत्तियों पर कोणीय धब्बे बनते हैं जो बाद में ऊपरी पतियाँ पर भी फैल जाते हैं, पत्तियों सिकुड़ कर गिर जाती हैं तथा कंद प्रभाबित हो जाते हैं। अगेती फसल में यह रोग अधिक लगता है। यह भूमिजनित रोग है जिसके रोगकारक भूमि में 15 माह तक रहते हैं। फसल चक्र अपनाकर इससे बचाव किया जा सकता है। रोग से बचाव हेतु मैंकोजेब 75 डबल्यूपी की 2 कि0ग्रा0 मात्रा 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में स्प्रे करें। पाले से बचाव के लिए जिस रात पाला पड़ने की संभावना हो उस रात 12 से 2 बजे के आस-पास खेत की उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली ठंडी हवा की दिशा में खेतों के किनारे बोयी हुयी फसल के आस- पास, मेडों पर घास-फूस जलाकर धुआँ करना चाहिए। इससे बातावरण में गर्मी होती है तथा तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। पाले की संभावना पर खेतों में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। नमीयुक्त जमीन में काफी देर तक गर्मी रहती है तथा भूमि का तापमान कम नहीं होता। सर्दी में फसल की सिंचाई करने से 0.5 डिग्री से 2 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ जाता है तथा पाले से सुरक्षा हो जाती है। पाले से बचाव हेतु गंधक के तेजाब के 0.1 प्रतिशत घोल (1 लिटर तनु सल्फ्यूरिक एसिड $1000 लिटर पानी का घोल) प्रति हेक्टेयर क्षेत्र में प्लास्टिक स्प्रेयर से स्प्रे करने पर 15 दिन तक पाले का असर नहीं होता, साथ ही पौधों में लौह तत्व एव रसायनिक सक्रियता बढ़ जाती है जो पौधों में रोग रोधिता बढ़ाने तथा फसल को जल्दी पकाने में सहायक होती है। इस प्रकार कृषक अपनी दलहनी, तिलहनी, आलू आदि फसलों को उक्तानुसार पाले तथा झुलसा रोग से बचाव कर सकते हैं। अपनी समस्या को सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली के मोबाइल नंबर 9452257111,9452247111 पर व्हाट्सएप के माध्यम से या टेक्स्ट मैसेज द्वारा भेजकर तत्काल समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

Editor CP pandey

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